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मन्त्र

'नहीं जी, यही तो एक लड़का था। सुना है सबने जवाब दे दिया है।'

'भगवान् बड़ा कारसाज है। उस बखत मेरी आँखों से आँसू निकल पड़े थे ; पर इन्हें तनिक भी दया न आई थी। मैं तो उनके द्वार पर होता, तो भी बात न पूछता।'

'तो न जाओगे ? हमने तो सुना था सो कह दिया।'

'अच्छा किया अच्छा किया, कलेजा ठण्डा हो गया, आँखें ठंडी हो गई। लड़का भी ठण्डा हो गया होगा ! तुम जाओ। आज चैन की नींद सोऊँगा। (बुढ़िया से) जरा तमाखू ले ले। एक चिलम और पीऊँगा। अब मालूम होगा लाला को ! सारी साहिबी निकल जायगी, हमारा क्या बिगड़ा। लड़के के मर जाने से कुछ राज तो नहीं चला गया। जहाँ ६ बच्चे गए थे वहाँ एक और चला गया। तुम्हारा तो राज सूना हो जायगा। उसी के वास्ते सबका गला दबा-दबाकर जोड़ा था न ! अब क्या करोगे। एक बार देखने जाऊँगा ; पर कुछ दिन बाद। मिजाज का हाल पूछूँगा।'

आदमी चला गया। भगत ने किवाड़ बन्द कर लिये, तब चिलम पर तमाखू रखकर पीने लगा।

बुढ़िया ने कहा--इतनी रात गए जाड़े-पाले में कौन जायगा।

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