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नया निवेदन

आज फिर कोई सोलह वर्ष बाद इस पुस्तक का यह तीसरा संस्करण निकल रहा है। इस बीच में श्रीहर्ष और उनके ग्रंथादि के विषय में किसी नई खोज का हाल लेखक को नहीं मालूम हुआ। अतएव दूसरे संस्करण में यह पुस्तक जैसी थी, वैसी ही इस संस्करण में भी प्रकाशित की जा रही है। रही भाषा की बात, सो उसमें कहीं-कहीं कुछ यों ही-सा संशोधन और परिवर्तन ज़रूर किया गया है।

दौलतपुर महावीरप्रसाद द्विवेदी
(रायबरेली)
२९ जुलाई,१९३३ ई॰