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श्रीहर्ष की गर्वोक्तियाँ

ब्यास अपने 'विहारी-विहार' में स्वप्रशंसात्मक यदि दो-एक बातें किसी मिष कह दें, तो विशेष आक्षेप की बात नहीं । श्रीहर्ष का पांडित्य और कवित्व निःसंशय प्रशंसनीय है। परतु इन्होंने अपने विषय में जितनी गर्वोक्तियाँ कही हैं, उतनी, जहाँ तक हम जानते हैं, दो-एक को छोड़कर और किसी ने नहीं कहीं।




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