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पाँचवाँ परिच्छेद

निर्मला का विवाह हो गया। ससुराल आ गई। वकील साहब का नाम था मुन्शी तोताराम। साँवले रङ्ग के मोटे-ताज़े आदमी थे। उम्र तो अभी चालीस से अधिक न थी, पर वकालत के कठिन परिश्रम ने सिर के बाल पका दिए थे। व्यायाम करने का उन्हें अवकाश न मिलता था। यहाँ तक कि कभी कहीं घूमने भी न जाते, इसलिए तोंद निकल आई थी। देह के स्थूल होते हुए भी आए दिन कोई न कोई शिकायत होती रहती! मन्दाग्नि और बवासीर से तो उनका चिरस्थायी सम्बन्ध था। अतएव बहुत फूँक-फूँक कर क़दम रखते थे। उनके तीन लड़के थे। बड़ा मन्साराम सोलह वर्ष का था, मँझला जियाराम बारह और छोटा सियाराम सात वर्ष का। तीनों अङ्गरेज़ी पढ़ते थे। घर में वकील साहब की विधवा बहिन के सिवा कोई औरत न थी।