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छोड कर अपनी सब पुस्तकों का अधिकार बाबू रामदीन सिह को ही दे या था। "ब्राह्मण" में पण्डित प्रतापनारायण धार्मिक, सामाजिक और राजनैतिक सभी तरह के लेख लिखते थे। यहा तक कि आप खबरें भी छापते थे। कभी कभी कानपुर की बहुत छोटी छोटी खबर तक भी आप प्रकाशित कर देते थे। "ब्राह्मण" का पहला अङ्क होली के दिनों में निकला था। उसकी प्रस्तावना में प्रतापनारायण ने, उसकी पैदाइश होली की घतलाकर, आगे चलकर, थोडी दूर पर होली पर ही पक लेख लिखा। लेख दिल्लगी से भरा हुआ है। पर उसके बीच में जो मत मतान्तर को बातें श्रा गई है, वे जयरटस्तो लाई गई मालूम होती है।

"ब्राह्मण" में केसे लेेेेेेेेख निकलते थे इसका अन्दाज़ालगाने के लिए कुछ लेखों के नाम हम नीचे देते है- १। येगार, २ । होली,३। रिश्वत ४ । देशोन्नति, ५ । गुम उग (दूकानदार), ६ । मुच्छ, ७ । कानपुर माहात्म्य (आरहा), ८शाकाथु (हरिश्चन्द्र के मरने पर कविता), । विस्फोटक १० । भाग्न रोदन (कविता), ११ । देशी कपडा, १२ । प्रेम पव परोधर्म, १३ । गगाजी, १४ । मानस रहस्य, १५ । चन्दरों की सभा, १६ । टेढ जानि शङ्का मय काह १७ । धूरे के लत्ता पिन, कनातन का टोल गधे, १८ । सरी बात शहिदुल्लाप, सर के जी ते उतर रहै, १६ । जाने न तूझे, फठीता लेके जूझ, २०। हाथी चणे ही जाते हे कुत्ते भौका हा करते है, इत्यादि ।

" ब्राह्मण" के जमाने में हिन्दी की तरफ लोगों का ध्यान नया हो नया गया था। इसम मामिक पुस्तकों में जैसे लेख होने चाहिये से यहुत का लेरा'मासण" में निकले। हमन