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अत्याचार किये। उनका वर्णन हम ने अन्यत्र किया है। यहां हम इतना बता देना चाहते हैं कि मसीह के बाद भी ऐसे धर्म ग्रन्थों का निर्माण होता रहा। जिन में भूत प्रेत आदि का ज़िक्र था। कुछ लोगों को जादूगर होने के सन्देह में जिन्दा जला दिया गया या फांसी देदी गई। उस समय तक भी ईसाई लोग मूर्त्ति की पूजा ठाट बाट से करते थे, धीरे धीरे पुजारियों के अधिकार बढ़ने लगे थे। उनकी मृत्यु पर उनकी समाधि पर गिर्जा बनाये जाते थे। व्रत करना शैतान को भगाने का और अविवाहित रहना नेकी का ठीक उपाय समझा गया था। क़ब्रों की यात्राएं होती थीं, पवित्र जल की महिमा बढ़ गई थी। पुजारी लोग भी देवताओ की भांति पूजे जाते थे। मृतात्माएं मन्त्रों के बल से बुलाई जाती थी और वे संसार भर की ख़बरें जानती थीं। साधुओं की क़ब्रों की मिट्टी और उनके वस्त्र तक पुजने लगे थे। पुरोहितों का पाखण्ड दिन दिन बढ़ने लगा था, वे धूम धाम से गाजे बाजे के साथ सवारी निकलवाते, धार्मिक अवसरों पर कोड़े लगवाते, सिर मुण्डाते, मठो मे रहते और मिथ्या विश्वासों को जन साधारण में उत्पन्न करते थे। इन मूर्त्ति पूजकों में बहुत से प्राचीन उच्चवंश के लोग सम्मिलित थे। उनका दावा था कि मनुष्य के जानने योग्य सब कुछ उनकी धर्म पुस्तकों में है।

धीरे धीरे इन में दूसरा दल उत्पन्न हुआ और वह मानवी बुद्धि पर धर्म की बातों को तोलने लगा। दोनों दलों में पूरी मुठभेड़ हुई। परन्तु पुराने पादरियों की शक्ति इतनी बढ़ गई थी