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बाल पत्नियों के भयानक कष्टों को हमें देखने के बहुत अवसर मिले हैं। इस कुप्रथा से हमारा बहुत कुछ शारीरिक और मानसिक ह्रास हो रहा है। बड़ी उम्र के लोग जो अपना दूसरा और तीसरा विवाह करते हैं। उनकी पत्नियों की बड़ी दुर्दशा होती है। वे प्रायः पति संसर्ग से भागा करती हैं। और अन्त में उनके साथ जो व्यवहार किया जाता है। उसे बलात्कार के सिवा कुछ कहा ही नहीं जा सकता।

एक चालीस वर्ष के पुरुष ने ग्यारह वर्ष की बालिका से शादी की थी। कुछ दिन बाद ही उसके गर्भ रह गया जो उसका आप्रेशन करके बच्चा निकाला गया। और वह लड़की सदा के लिये अपंग होगई।

एक रोमांचकारी घटना हमें मालूम है कि ग्यारह साल की लड़की का विवाह पैंतीस वर्ष के एक व्यक्ति से हुआ था। यह व्यक्ति प्रतिष्ठित और सम्पन्न था। उसने हठ पूर्वक बालिका को बुला लिया। उसकी माता ने विदा करने से पूर्व कृत्रिम रीति से उसके गर्भाशय को बड़ा करने की चेष्टा की। जिससे उसके शरीर से रक्त का प्रवाह जारी होगया। जब वह पति के पास गई और उसने सहवास किसी भी भाँति स्वीकार न किया तब क्रोध में आकर उसने उसे तिमंज़िले पर से सड़क पर फेंक दिया। और वह कुछ देर बाद मर गई।

हाल में बंगाल के अन्तर्गत नोआखाली नामक स्थान से एक ऐसा लोमहर्षक समाचार आया है जिसने रात-दिन घटित