पृष्ठ:दृश्य-दर्शन.djvu/१४०

यह पृष्ठ जाँच लिया गया है।
१३५
नेपाल

ये लोग वहाँ के आदिम निवासी हैं और हिन्दुस्तान के गोड, भील और सौंताल आदि को तरह अलभ्य और जङ्गली हैं।

पहले नेपालियों में गोत्र या कुल का भेद न था। पर जब से हिन्दुस्तानियों ने नेपाल में कदम रक्खा और धीरे-धीरे पर्वतिया जाति की उत्पत्ति हुई तब से यह बाल भी वहां हो गई। पर्वतिया लोगों में थापा,बिसनायत,भण्डारी,अधिकारी,कार्की और दानी इत्यादि कुल भेद प्रचलित हैं। इन लोगों के सम्पर्क से मगर लोगों में राना और थापा आदि भेद हो गये हैं। पर गुरुंग जाति में इस भेद-भाव का अभी तक प्रचार नहीं हुआ।

गोर्खा लोग पर्वतिया भाषा बोलते हैं ! वह संस्कृत से निकली है। जब से हिन्दुस्तानियों का प्रवेश नेपाल में हुआ तभी से इस भाषा की नीव वहाँ पड़ी। नेपाल के पुराने प्रभु नेवार लोगों की भाषा और ही है। उसका नाम नेवारी है। और और जाति वालों में से कुछ तो तिबत को भाषा बोलते हैं और कुछ सिकम और भुटान की।

गोर्खा लोग हिन्दू धर्म के अनुयायी हैं। नेवार लोगों में से कुछ हिन्दू हैं और कुछ बौद्ध । जो हिन्दू हैं वे शैवमार्गी नेवार कहलाते हैं और जो बौद्ध हैं वे बौद्ध मार्गी नेवार। पर सच पूछिए तो बौद्धमार्गी नेवारों का ठीक ठीक कोई धर्म ही नहीं। वे हिन्दुओं के देवी-देवताओं को भी पूजते हैं। और बुद्ध को भी पूजते हैं। लिम्बू,किराती,भोटिया ओर लेपचा भी बौद्ध हैं। नेपाल में व्यापार, कारीगरी और कृषि प्रायः नेवार लोगों ही के हाथ में है।

नेपाल में साधारण आदमियों का भोजन चावल और तरकारी