पृष्ठ:दुर्गेशनन्दिनी प्रथम भाग.djvu/७१

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हाथ पकड़ चाभी छीन ली।

बिमला इस पर बहुत खिसिआई। पहिले तो सेनापति ने चाभी टेंट में किया फिर और २ जो कुछ किया वह विमलाही जानती है और पकड़ कर उसका हाथ पैर भी बांध दिया।

बिमला ने कहा यह क्या।

उसमान ने कहा यह तुम्हारा पुरस्कार है।

बि०| इस कर्म्म का फल तुमको शीघ्र मिलेगा।

सेनापति विमला को उसी अवस्था में छोड़ चला गया और कुछ दूर जाकर फिर लौटा, स्त्रियों की रसना का विश्वास नहीं, और उसका मुंह भी बांध दिया।

पूर्वोक्त राह से उतर कर विमला की कोठरी के नीचे वाली कोठरी में पहुंचा और उसी की भांति चाभी लगाय द्वार खोल उसमान खां ने धीरे २ सीटी बजाई, उसको सुन अमराई में से एक मनुष्य उबेने पैर धीरे २ आया और घर में घुस पड़ा, उसके पीछे एक और आया इसी प्रकार बहुत से पठान भीतर घुस आए। अन्त में जो एक मनुष्य आया उससे उसमान ने कहा-बस और नहीं तुम लोग बाहर रहो जब मैं शब्द करूं तो दुर्ग पर आक्रमण करना, ताज खां से भी कह देना।

वह फिर गया और उसमान इस टुकड़ी को लेकर फिर कोठे पर चढ़े और जहां बिमला बंधी पड़ी थी वहीं पहुँच कर बोले यह स्त्री बड़ी चतुर है इसका कभी विश्वास न करना रहीम शेख तुम्हारा इस पर पहरा है। मुंह इसका खोल दो और यदि भागे अथवा किसी से कुछ कहै या चिल्लाय तो स्त्री के मारने में कुछ दोष नहीं है अच्छाः—