पृष्ठ:दुर्गेशनन्दिनी प्रथम भाग.djvu/३२

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को नींद नहीं आती भूषन बसन अच्छा नहीं लगता, रात दिन सोच में रहती है और चेहरे पर श्यामता आगई है।

अभिराम स्वामी सुनकर चुप रहे। थोड़ी देर के अनन्तर बोले "मैं जानता था कि देखते ही गहिरी प्रीत नहीं होती पर स्त्री चरित्र और विशेषतः बालिका चरित्र का मर्म्म ईश्वर ही जानता है। अब क्या करना उचित है? बीरेन्द्र तो इस सम्बन्ध को कदापि स्वीकार न करैगा बिमला ने कहा "इसी सोच में मैंने अभी तक इसका प्रकाश नहीं किया, मन्दिर में बीरेन्द्रसिंह को भी मैने कुछ पता नहीं दिया, किन्तु यदि 'सिंहजी' यह शब्द कहते समय बिमला के मुंह का रंग बदल गया, यदि "सिंहजी” मानसिंह से मित्रता करलें तो फिर जगतसिंह को जमाई बनाने में क्या हानि है?"

अ०। मानसिंह क्यों मानेगा?

बि०। न माने तो नहीं सही।

अ०। तो क्या जगतसिंह बिरेन्द्रसिंह की कन्या को स्वीकार करेगा?

बि०। जाति में तो किसी के दोष हैई नहीं, जयधरसिंह के पुर्खे भी तो यदुवंशी थे।

अ०। यदुवंशी की कन्या मुसल्मान के दोगले पुत्र की बहू होगी?

विमला ने स्वामी की ओर घूर कर कहा 'क्यों न होगी क्या यदुवंशी कुल नीच है?'

यह बात सुनकर परमहंस की आंखें क्रोध से लाल होगई और बोले 'पापिन! तू न मानैगी? दूर हो यहां से'।।

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