पृष्ठ:दुर्गेशनन्दिनी द्वितीय भाग.djvu/९४

यह पृष्ठ जाँच लिया गया।


आर्दश नगरी।

यह उपन्यास बड़ाही रोचक है इस में विज्ञान की हानि और लाभ दोनों ही दिखलाए हैं इस में नगरी केसी बसन चाहिये और उत्तम नगरी से क्या लाभ है खूब दिखाया है इस रचयता बा॰ बेणी प्रसादजी हैं पहला माम ॥) दूसरा भाग

बुन्देलखण्ड का शिवाजी।

महाराज छत्रसाल जी काजीवन चरित्र।

'बुन्देलखण्ड केशरी' नामक पुस्तक छपगई है । इस बुन्देलखण्ड के महाराज छत्रसालजी के जीवन वृत्तान्त का ले। है, पद्य में लाल कविकृत छन प्रकाश में भी महाराज की विरता का वर्णन है, किन्तु बुन्देलखण्ड केशरी में महाराज के जन्म लेकर अन्त पर्य्यत उनकी समस्त वीरता, वीरता, पुरुषार्थ, नीति चातुर्य्य और देशहितैषिता का क्रम से गद्य में वर्णन है साथ. इस के बुन्देलखण्ड का संक्षिप्त इतिहास और प्राणनाथजी जीवन चरित्र भी संक्षेप में लिखा गया है। पुस्तक सचित्र माग की कीमत |||) मात्र है।

बालाविनोद।

यह पुस्तक स्त्री शिक्षा पर अतिरोचक तथा बड़ी लाभदाय है इसको र्स्वगवासी बा॰ बंसीलालसिंह ने लिखा था । यः कामिनि कलपद्रुम का एक भाग है इसको संशोधित करके बा स्यामसुन्दर दासजी बी० ए० ने सम्पादित किया है इस ब्याही लड़कियों के लिये उपदेश कूट कूट केरके भरा है जो विवाह समय की प्रतिज्ञा, परस्पर प्रेम,आचार विचार, पति है। बड़ों की प्रतिष्टा, छोटों के साथ बरताव, गृहस्थ के चलाने में रीति, स्वास्थ, इत्यादि ५९ विषय हैं। अवश्य मंगाइये मूल्य ।।

पुस्तक मिलने का पता---

माधोप्रसाद पुस्तक कार्यालय काशी