पृष्ठ:दीवान-ए-ग़ालिब.djvu/२३१

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तरावत-ए-सहर ईजादि-ए-असर, यकसू
बहार-ए-नालः-औ-रँगीनि-ए-फुगाँ तुझ से

चमन चमन गुल-ए-आईनः दर कनार-ए-हवस
उमीद मह्व-ए-तमाशा-ए-गुल्सिताँ तुझ से

नियाज, पर्दः-ए-इज़हार-ए-ख़ुदपरस्ती है
जबीन-ए-सिज्दः फ़िशाँ तुझसे, आस्ताँ तुझ से

बहानः जूइ-ए-रहमत, कमी गर-ए-तक़रीब
वफ़ा-ए-हौसलःऔ-रॅज-ए-इम्तिहाँ तुझ से

असद, ब मौसम-ए-गुल दर तिलिस्म-ए-कुंज-ए-क़फ़स
खिराम तुझसे, सबा तुझसे, गुल्सिताँ तुझ से