पृष्ठ:टोबा टेकसिंह.djvu/३०

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आखिरी सिरा पा गया तो खुशिया ने ड्राइवर को हिदायत दी, 'बायें हाथ मोड लो।' टैक्सी बायें हाथ मुड गई। अभी ड्राइवर ने गियर भी न बदला था कि खुशिया ने कहा, 'यह सामने वाले खम्भे के पास रोक लेना जरा।' ड्राइवर ने ठीक खम्भे के पास टैक्सी खडी कर दी। खुशिया दर- वाजा खोलकर बाहर निकला और एक पान वाले की दुकान की तरफ वढा । यहा से उसने पान लिया और उस आदमी से जो कि दुकान के पास खडा था, चद बातें की और उसे अपने साथ टैक्सी पर बैठाकर ड्राइवर से बोला 'सीधे ले चलो।' देर तक टैक्सी चलती रही। खुशिया ने जिधर इशारा किया, ड्राइवर ने उधर हैण्डल फर दिया। रोमक वाले कई बाजारो से होते हुए टैक्सी एक नीम रोशन गली म दाखिल हुई, जिमम बहुत कम लोग आ जा रहे थे। कुछ तोग सडक पर विस्तर जमाए लेते थे, उनमे से कुछ बडे इत्मीनान से चम्पी करा रहे थे । जब टैक्सी उन चम्पी कराने वाला से आगे निकल गई और काठ के एक बगलेनुमा मकान के पास पहुची तो खुशिया ने ड्राइवर को ठहरने के लिए कहा 'बस, अब यहा “रुक जाग्रो । टैक्सी ठहर गई तो खुशिया ने उस आदमी से, जिसकी वह पान वाले की दुकान से अपने साथ लाया था, धीरे से कहा, 'जामा, मैं यहा इतजार करता है। वह आदमी, बेवकूफो की तरह खुगिया की तरफ देखता हुआ टैक्सी से बाहर निकला और सामने वाले लकड़ी के मकान में घुस गया। खुशिया जमकर टैक्सी के गद्दे पर वठ गया । एक टाग दूसरी टाग पर रखकर उसन जेव से बीडी निकालकर सुलगाई और दो कश लेकर बाहर सडक पर फेंक दी। वह अब वडा वेचैन था इसलिए उसे लगा कि टैक्सी का इजन वद नहीं हुआ। उसके सीने मे कि फन्फाहट- सी हो रही थी इसलिए वह समझा कि ड्राइवर ने बिल बढाने के लिए पेट्रोल छोड रखा है। चुनाचे उसन तेजी से कहा, 'यो वेवार इजन चालू रखकर तुम कितने पस और वढा लोगे ?' खुशिया | 29