पृष्ठ:टोबा टेकसिंह.djvu/१६८

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मैंन तुरत पूना देलीफोन दिया, लेकिन पोर पर कोई न मिल सका ।

एक हफ्ते के बाद चड्ढा का खत प्राया , जिसम उस हत्याकाण्ड का पूरा विवरण था ! गत को सय साए हुए 4 वि अचानक चड्ढे वे पलग पर कोई गिरा । वह हडबडापर उठा । बिजली जलाइ तो देवा , सेन है , पूनम लथपथ । चड्ढा अभी अच्छी तरह अपन हा -हवाग सम्भालन भी न पाया या मि दरवाजे म राममिह दिपाई दिया । उसके हाय म छुरी थी । तुरत ही गरीबावाज और रजीतयुमार भी पा गए । सारी सईदा काटज जग गई । रजीतामार और गरीवनवाज ने रामसिंह वो पकड लिया

और छुरी उमये हाथ म छोर ली । चडढा न मन को अपन पलग पर लिटाया और उसस धावा क बारे में कुछ पूछन ही वाला था कि उसने प्रासिरी हिचकी ली और ठण्डा हो गया । __ रामसिह गरोवनवाज और रजीतकुमार की जकड में था मगर वे दोगो काप रह थे । सेन मर गया तो रामसिंह न चड्ढा से पूछा, " भापा जी मर गया ___ चडान हा म उत्तर दिया, तो रामसिह न रजीनवुमार और गरीवनवाज म कहा, मुझे छोड दीजिए, मैं भागूगा नहीं ।

चडटा की समभ म नहीं पाता था कि वह क्या करे । उसन तुरत नौपर भेजकर मम्मी पो बुलवाया ! मम्मी पाई तो मब निश्चित हो गए कि मामला सुलझ जाएगा । उसन रामसिंह को छुड़वा दिया भार थोडी दर के बाद अपन माथ थान ले गई पार उमया वयान दज करा दिया । एमवे वार चढा और उसके साथी कई दिन तक बडे परेशान रहे । पुलिस की पूछताछ क्यान , फिर अदालत मे मुरदम की परवी । मम्मी इस बीच बहुत दौडधूप करती रही थी । चडता का विश्वास था कि राम सिंह बरी हो जाएगा और ऐसा ही हुआ । अदालत ने उसे माफ बरी कर दिया । अदालत म उसका वही बयान था जो उसने थाने में दिया था । मम्मी ने उससे कहा था , वटा, घबराना नहीं, जो कुछ हुग्रा है , मच-सच बता दो । और उसने मारी बातें ज्या वी त्या वयान पर दी थी वि सेन ने उस प्लेवक मिगर बना देने का लालच दिया था । म्बय उसे भी सगीत स बहुत लगाव था और सन बदा अच्छा गान वाला था । वह इस चक्कर

मम्मी / 165