पृष्ठ:टोबा टेकसिंह.djvu/१५९

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हो गइ । चड्ढे की जान लटसडा रही थी । वह एक कुपुत्र की तरह मम्मी स बदजवानी वरन तगा । फिलिम न एक हद तक बीच बचाव करन की कोशिश की , लेकिा चटटा हवा के घोड़े पर सवार था । वह पिलिम को अपन साथ सईदा वाटेज मे ले जाना चाहता था और मम्मी इसके खिलाफ थी । यह उसको बहुत देर तक समभानी रही कि वह इस इरादे मे बाज पाए लेकिन वह इसके लिए तयार न होता था और बार बार मम्मी मे पहा रहा था , तुम पागत हो गई हो बूढी दलाला फिलिम मेरी है पूछ लो इमस ।

मम्मी ने बहुत दर तब उसकी गालिया सुनी , अत मे बडे समझाने वाल ढग मे उससे कहा, चडढा, माई सन तुम क्यो नहीं समझते शी इज यग शो इज वेरी यग ।

उसकी आवाज मे कप पाहट थी , एक प्राथना थी एक ताडना थी , एक बड़ी भयानक तसवीर थी , लेकिन चडढा विल्कुल न समझा । उम समय उसक सम्मुख वेवल फिलिस और उसकी प्राप्ति थी । मैंन फिलिम की और देखा और पहली बार इस बात वा महसूस किया कि वह सचमुच बहुत छोटी उम्न की थी , मुश्किल स प द्रह वप की उसका सफद चहरा, चादी रग के बादलो मे घिरा हुअा उपा की पहली चूद की तरह कपकपा रहा था । ____ चन्दन उम वाह से पकडकर अपनी पार खीचा प्रार फिल्मा के हीरो के ढग से अपीछाती से लगाकर भीच लिया । मम्मी एक्दम लात हावर चिल्लाई, चडढा छोड दो फौर गाड सेक छोड दो इम ।

जा चड्ढे ने अपने चौडे सीने से पिलिस को अलग न किया तो मम्मी ने उसके मुह पर एक जोरदार चाटा मारा और चिल्लाइ, गट प्राउट गेटमाउट "

चड्ढा मोचाका रह गया । पिलिस को अलग करके उसन धक्का दिया और मम्मी की ओर माग बरसाने वाली नजरा स देयताप्रा बाहर चला गया । मा भी उठकर विदा ती और चडदे के पीछे पीछे चल दिया ।

सईदा पाटेज पहुचपर मैंन देखा कि वह पतलून कमीज और बूटा समत पलग पर औंधे मुह पड़ा था । मैंन उमस बाई बात न की और दूसरे 156 / टोबा टेवसिंह