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जहांगीर बादशाह संवत १६६३।

पहले सोनेमें तुला तीन मन सोना चढ़ा। फिर ग्यारह बेर और पदार्थों में तुला। यह तुलादान एक साल में दो बार सूर्य्य और चन्द्र के ववर्राम्भके समय सोने चांदी धातु रेशम कपड़े और धानादि वस्तुओं में होता था। दोनोका धन अलग अलग खजाञ्चियों को पुण्य करने के लिये सौंपा जाता था।

कुतुबुद्दीनखां कोका ।(१)

इसी दिन धायभाई कुतुबुद्दीनखांको बादशाहने खासा खिलअत जड़ाऊ तलवार और खासा घोड़ा जड़ाऊ जीनका देकर बङ्गाले और बिहारको सूबेदारीपर जो पचासहजार सवारोंकी जगह थी बड़ीभारी सेनाके साथ भेजा। दो लाख रुपये उसको और तीन लाख रुपये उसके सहकारियोंको दिये। बादशाहको अपने इस धायभाई और इसकी माके साथ सगी मा और भाई बेटोंसे अधिक प्रेम था।

केशव मारू।

केशवदास मारूका मनसब डेढ़हजारी होगया।

नथमल मंझोलीका राजा।

मंझोलीके राजा नथमलको बादशाहने पांचहजार रुपये दिये।

मिरजा अजीज कोका।

मिरजा अजीजकोकाने बुरहानपुरके राजा अलीखांको एक पत्र भेजा था। उसमें अकबर बादशाहकी बहुतसी निन्दा लिखी थी। यह पत्र बुरहानपुर में राजा अलीखांके माल असबाबके साथ अबुलहसनके हाथ लगा। उसने बादशाहको दिखलाया। बादशाहको पत्र पढ़कर बहुत क्रोध हुआ। बादशाह लिखता है--जो मेरे पिताने उसकी माताका दूध न पिया होता है उसको अपने हाथसे बध करता। मेरा यही निश्चय था कि उसका वैर मुझसे खुसरोकी दामादीके कारण है। पर इस पत्रसे उसकी दुष्टता और नमकहरामी मेरे बापके साथ भी सिद्ध हुई। जिन्होंने उसको और उसके घरानेको धूलसे उठाकर आकाश


(१) कोका तुर्की में धायभाईको कहते हैं।