पृष्ठ:जहाँगीरनामा.djvu/३०३

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संवत्१६७४।

२८७ । संवत् १६७४ । बादशाह न था और अफरातफरीके दिन थे। इसलिये दिलावर खांका बेटा होशंग जो योग्य और साहसौ था अवसर पाकर मालवे के सिंहासन पर बैठ गया। उसके मरने पर यह राज्य उसके वजीर "खानजहां" के बेटे महमूद खिलजीके हाथमें चला गया। उससे उसके बेटे गयासुद्दीनको मिला। उसको विष देकर उसका बेटां नासिरुद्दीनं गद्दी पर बैठा। उसके पीछे उसका बेटा सहमूद उत्तरा- धिकारी हुआ। उससे सुलतान बहादुर गुंजरांतीने मालवा छौन लिया और मालवेके बादशाहोंकी परम्परा नष्ट होगई। ", ". कटाराम . ६ (अगहन बदौ १४) सोमवारको 'बादशाहने जड़ाऊ तलवार, एक सौ तोलेकी मोहर और बीस हजार दरब ऊदारासको दिये। . . सादलपुर। .. .: . ___ बादशाह ४॥ कोस चलकर सादलपुरमें ठहरा। इस गांव में एक नदी है जिसपर नासिरुद्दीन खिलजाने पुल बांधकर कालि. यादहके समान विलासभवन बनाये थे । : बादशाहने रातको उस नदी और उसके कुण्डों पर दौपमालिका कराई। । . . : . शाहजहांको लाल और मोती। .. ८ (गहन सुदौ २) गुरुवारको प्यालोंकी सजलिस हुई। बाद- शाइने एक लाल और दो मोती शाहजहांको दिये। लाल पच्चीस हजार रुपयेका टांक और ५ रत्ती भरका था। बादशाह लिखता है-“यह लाल मेरे जन्मकालमें मेरी दादौने मेरो मुंह दिखाई में दिया था। वर्षों तक मेरे पिताके सरपेचमें रहा। उनके पीछे मैंने भी सरपेचहीमें रखा था। बहुमूल्य और सुन्दर होनेके सिवा यह इस राज्य के वास्ते शभ भी रहता आया है इसीलिये शाह जहांको दिया गया।" ___उदाराम दक्षिण। इसौ दिन बादशाहने खिलअत हाथी और इराको घोड़े देकर