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जहांगीरनामा।

आप मर जावेगा। बादशाहने कहा कि जो ऐसाही है तो जिबहकर डालो। पर जब उसके गले पर छुरी रखी गई तो वह फारसे उड़ गया। फिर जब बादशाह नावसे उतरकर घोड़े पर बैठा तो एक चिड़िया हवाके झोंकेसे एक शिकारी बरके पर गिरी और उसकी आलमें छिद कर मर गई। बादशाहने दैवगतिको इस विचित्रता से अति अाश्चर्य करके कहा “वहां. तो मृत्युबिहीन तोतरको थोड़े ही समय में वैसे तौल संकट से बचाया और यहां मृत्युवश चिड़ियाको इस प्रकार भालेमें पिरोकर मारा।" जलवायु और.. स्थलको उत्तमता देखकर यहां सौ दो दिन बादशाहने विश्वास- किया।

रावत सगरके मनसब पर इब्राहीमखां फोरोजजंगको प्रार्थनासे पांच सदी जात और एक हजार सवारको वृद्धि हुई।

६ (साध बदी ४) को कूच हुआ। बादशाह डेढ़ पाव चार कोम चलकर चांदाके घाटेसे गांव अमजार में पहुंचा। यह घाटा हरे भरे वृक्षोंसे बहुत शोभायमान था। वहां तया अजमेरको सीमा ८४ कोस थी। अब इस गांवसे मालवेका सूबा लगता था। यहां नूरजहाने एक कुरीशा (पक्षी) बन्दूकसे मारा था। अबतक वैसा बड़ा और जुरंग कुरोशा बादशाहने नहीं देखा था तुलवाया तो १८ तोले ५ माशेका उतरा

सूबा मालवा।

बादशाह लिखता है--- "मालवा दूसरी इकलोममें है इसको ल- बाई विलायत “करने” (ग)के नौवेसे बांसवाड़ेको विलायत तस २४५ कोस और चौड़ाई चंदेरीसे नंदखार परगनेतक २३० कोसको है। इसके पूर्वने बांधोंको विलायत उत्तरमें नरवरका किला दक्षिण ब- गलाना और पश्चिममें गुजरात तथा अजमेरके सूबेहैं। यह बहुत सजल विलायत है जलवायु अच्छा है नहरों नदियों और झरनोंके सिवा . इसमें पांच बड़े दरिया बहते हैं-१ गोदावरी २.भीमा ३ कालो- सिन्ध ४ नोरा (बेतवा) ५ नर्वदा। यहां वायु समभाव रहता है भूमि