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संवत् १६७३।

विगड़कर यह रोग फैला है। कुछ लोगोंने और और बातें कहीं। पूरा ज्ञान परमेश्वरको है।

शाह ईरानकी बेटी।

५ शहरेवर (भादों सुदी १५ तथा आखिन बदौ १) को पांच हजार रुपये मौरमौरांको माके वास्ते जो ईरानके शाह दूसरे इस- माईलकी बेटी थी व्यापारियोंके हाथ ईरानमें भेजे गये।

अबदुलहखां पर कोप।

६ (आश्विन बदौ २) को अहमदाबादकै बखशी और वाका नवीसको अर्जी आई। उसमें लिखा था कि अबदुल्लहखां फौरोज जङ्गको इच्छाके विरुद्ध मैंने कई समाचार, समाचारपत्रमें लिख दिये थे इस पर उसने मुझसे बुरा मानकर कुछ सिपाही मेरे ऊपर भेजे और अपने घर बुलाकर मेरा अपमान किया।

बादशाहने पहले क्रोध आकर उसको मरवा डालना चाहा परन्तु फिर दियानतखांको अहमदाबाद भेजा और उससे कहा कि वहांक निष्पक्ष पुरुषोंसे निर्णय करे। जो सच्ची बात हो तो अब: दुलहखांको अपने साथ ले आवे और अहमदाबादका शासन उसके भाई सरदारखांके अधिकारमें रहे ।

दियानतखांके जानेके पहलेहो यह समाचार अबदुल्लहखांको पहुंच गये और वह डरके मारे अपनेको अपराधी ठहराकर पैदल हो राजद्दारको चल दिया। दियानतखां मार्गमें उसको मिला और उसकी यह अद्भुत दशा देखकर सवार होनेको आज्ञा दी क्यों कि पैदल चलनेसे उसके पांव घायल होगये थे।

मुकर्रबखांको गुजरात।

मुकर्रबखां पुराना सेवक था और बादशाहको युवराजावस्थासे ही गुजरात देशके लिये प्रार्थना किया करता था। अब जो अबदुल्लहखांसे ऐसा अपराध बन आया तो बादशाहने अपने पुराने सेवकको आशा पूरी करके उसको गुजरातको सूबेदारी देदी। :

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