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संवत् १६६६।

८ गवैयोंको दरबारके ढ़ङ्ग पर चौकी देनेका कष्ट न देवें।

९ बाहर नक्कारा न बजावें।

१० घोड़ा हाथी चाहे बादशाही नौकरोंको देवें चाहे अपने चाकरोंको, पर बाग और अंकुश उसके कंधे पर रखाकर तसलीम न करावें।

११ सवारीमें बादशाही नौकरोंको अपनी अरदलीमें पैदल न ले जावें और जो कुछ उनको लिखें तो उस पर मोहर न करें।

यह जाबते जहांगीरी आईनके नामसे प्रचलित होगये थे।

सातवां नौरोज।

१६ मुहर्रम (चैत्र बदी ४) मंगलवारको सातवें नौरोजका आगरे में उत्सव हुआ। बादशाह चैत्र बदी ६ गुरुवारको ४ घड़ी रात गये ज्योतिषियोंके बताये हुए मुहर्तमें सिंहासन पर बैठा। अफजलखांकी भेट बिहारसे पहुंची। तीस हाथी १८ गोट(१) बंगालके कुछ कपड़े अगर चन्दनके लठ्ठे कस्तूरीके नाफे तथा अन्यान्य बहुतसी चीजें थीं।

खानदौरांको भेटमें ४५ घोड़े ऊंट दो कतार, चीनी खताई बरतन, समूरके चमड़े और वह पदार्थ जो काबुल मण्डलमें मिल सकते थे आये।

ऐसेही और अमीरोंको भेटें भी विधिपूर्वक उत्सवके दिनोंमें होती रहीं।

बङ्गालमें फतह।

१३ फरवरदीन (चैत्र बदी ३०) को इसलामखांकी अर्जी बंगाल से पहुंची उममें उसमान पठानके मारे जानेका हाल लिखा था। पहिले बंगालमें पठानोंका राज्य था। वह अकबर बादशाहने छीन लिया था। केवल यह उसमान एक कोने में स्वतन्त्र रह गया था। इसलामखांने ढाकेसे शुजाअतखांको फौज देकर उसके ऊपर भेजा। जब यह उसमानके किलेके पास पहुंचा तो दूत भेजकर उसको


(१) एक जातिके घोड़े।