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सं० १६६६।

दक्षिणका युद्ध।

बादशाहने आगरेके कानूंगो बिहारीचन्दके भतीजेको आगरेके किसानोंमेंसे भरती किये हुए एक हजार पैदलों सहित परवेजके पास भेजा। पांच लाख रुपये और उसके पास खर्चके लिये भेजे।

४ शब्बाल (पौष सुदी ५) गुरुवारको बादशाहने रुपये बांटे। उनमेंसे एक हजार रुपये पठान (१) मिश्रको मिले।

नक्कारा देनेका प्रवन्ध।

बादशाहने हुक्म दिया कि नक्कारा उन लोगोंको दिया जावे जिनका मनसब तीन हजारी या तीन हजारीके ऊपर हो।

चन्द्रग्रहण।

पौष सुदी १५ को चार घड़ी दिन रहे चन्द्रग्रहण लगा। गहते गहते सब चांद गह गया। पांच घड़ी रात गये तक गहाही रहा। बादशाहने उसके दोष निवारणके लिये सोने चान्दी कपड़े और धानका तुलादान किया। घोड़ोंका दान भी किया। सब मिला कर १५ हजारका माल दानपात्रोंको बांटा गया।

२५ (माघ बदी १२) को बादशाहने रामचन्द्र बुन्देलेकी बेटी उसके बापकी प्रार्थनासे अपनी सेवाके वास्ते ली।

बिहारीचन्द।

१ जीकाद (माघ सुदी ३) गुरुवारको बिहारीचन्दको पांच सदी जाती और तीन सौ सवारोंका मनसब मिला।

दक्षिण।

बादशाहने मुल्लाहयातीको खानखानांके पास भेजकर बहुतसी कृपासे भरी हुई बातें कहला भेजी थीं। मुल्ला वहां होकर लौट आया। खानखानांके भेजे एक मोती और दो लाल लाया। उनका मूल्य बीस हजार कूता गया।


(१) यह नाम फारसी लिपिमें भ्रमयुक्त होनेसे नहीं पढ़ा गया।

(१) चण्डू पंचांगमें पौष सुदी १५ शनिवारको २५ घ० ४७ प० पर चन्द्र ग्रहण लिखा है।