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जीवन चरित्र।


है। इससे पता चलता है कि ताताके जीवनका कितना प्रभाव लोगों पर है।

हिज एक्सेलेंसीने कहा कि ताताजीका खास गुण उनका व्यवसाय मिला हुआ दान था। इस संबंधमें हिन्दुस्तानके और किसी निवासीने इतना बड़ा काम नहीं किया है। ताताने अपने उदाहरण दिखला दिया है कि व्यवसायमें रुपया लगाने से सर्वसाधारणका विशेष लाभ होता है और बनिस्बत कोरे दान करने के अधिक रुपया भी दानमें दिया जाता है। ताताजी में दूसरी अपूर्व बात उनकी सादगी थी। आप सदा अपने देशवासियोंको लाभ पहुंचाते रहे। आपने अपने फायदेका बहुत कम ख्याल किया। आप काम करना चाहते थे नाम करना नहीं। आप तारीफसे इतना भागते थे कि रिसर्च इन्स्टीट्यूटके साथ आप अपना नाम नहीं जोड़ना चाहते थे गोकि आपही उस संस्थाके कर्ताधर्ता विधाता थे। स्मारक बनवानेमें मिस्टर ताताका कुछ लाभ नहीं है। फायदा इसमें सोलहों आना उनलोगोंका है जो इसको बनवा रहे हैं। मिस्टर ताताका आदर करके मानों हम उन गुणोंका आदर करते हैं जिनके कारण वे जगत् प्रसिद्ध हुए या जिनके प्रभावसे उन्होंने देश-सेवाके इतने बड़े बड़े काम किये।

स्मारक कमेटीने आधेलाखके लगभग रुपये इकट्ठे किये जिसमें न सिर्फ बंबई, बल्कि हिन्दुस्तानकी दूसरी जगहोंके लोगोंने भी चंदा दिया था। उन रुपयोंसे मिस्टर ताताकी प्रस्तरमूर्त्ति तैयार की गई