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जीवन चरित्र।


माल भेजने। पी० ऐंड ओ॰ और उसकी सहगामिनी कम्पनियो को कभी आशा न थी कि मिलवाले इतनी जल्दी एक होजायंगे, एक होकर इतने मार्केका काम करैंगे। इसलिये अचानक यह दशा देखकर वे बेतरह घबराई। लेकिन घबरानेसे क्या काम चल सकता था? अस्तु उनलोगोंने एक नई चाल निकाली। उनलोगोंने किराया घटाकर १३) और १९) रुपये प्रति घन टनसे २) धनटन कर दिये। पी॰ ऐंड ओ॰ ने तो अन्तमें १, कर दिया। कहां मुनाफेसे पेट भरी हुई तीन कम्पनियां और कहां अकेले मिस्टर ताता। बड़ाही विषम युद्ध था। निश्चय ताता महोदय की जीत हुई होती, लेकिन साथी मिलवालोंने अदूरदर्शिता का परिचय दिया। जिस आशासे जाल फैलाया गया था, वह सफल हुई। कहां ११) रुपये और कहां १) रुपया। वे लोग लोभको न रोक सके। लालच-वश उनलोगोंने अपना प्रण तोड़कर अपने देशको अपनी समुन्नत एशियायी शक्तिके सामने झूठा बनाया, ताता महोदयको नीचा दिखाया, घाटा पहुंचानेवाली कम्पनियोंके हाथमें अपनेको सौंप दिया। इस लड़ाईसे एक लाभ तो अवश्य हुआ कि किराया हमेशाके लिये पहलेसे कम होगया। ताता महोदयने इसके बाद एक और कम्पनी को ऐसीही शिक्षा दी।

इस तरहसे सन् १८७५ ई॰ से लेकर सन् १८९५ ई॰ तक ताता महोदयने स्वदेशीकी सफलताके लिये बहुतसे काम किये आपमें बड़ा भारी गुण यह था कि आप करते अधिक थे और