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चोखे चौपदे

सब दिनों साथ एक सूगे के।
दो ममोले हिले मिले देखे॥
मुँह तुमारे कमाल के बल से।
चाँद मे दो कमल खिले देखे॥

नाचती मछलियाँ, हरिन भोले।
हो ममोले कभी बना लेते॥
मुँह कभी निज अजीब आँखों को।
कर कमल, हो कमाल कर देते॥

है कही बाल भी कही आँसू।
और मुँह मे कही हँसी का थल॥
है कहो मेघ औ कही बिजली।
औ कही पर बरस रहा है जल॥

क्यों न मुँह को चॉद जैसा ही कहें।
पर भरम तो आज भी छूटा नहीं॥
चाँद टूटा ही किया सब दिन, मगर।
टूट कर भी मुँह कभी टूटा नहीं॥