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अन्योक्ति

हाथ कोई काम तू ऐसा न कर।
आबरू पर जाय जिस से ओस पड़॥
तब करेंगे क्यों न ठट्ठा लोग जब।
जाय गट्टे के लिये गट्टा पकड़॥

हो कलाई में जड़ाऊ चूड़ियाँ।
हाथ तो भी तुम न होगे जौहरी॥
उँगलियों में हों अमोल अँगूठियाँ।
मूठियाँ मणि मोतियों से हों भरी॥

दान के ही जो रहे लाले पड़े।
जो उखेड़े ही किये मुरदे गड़े॥
हाथ तब तुम क्या बड़े सुन्दर बने।
क्या रहे पहने कड़े मणियों-जड़े॥

जो लुभाता कौड़ियालापन रहा।
हाथ तुम को फैलना ही जब पड़ा॥
क्या किया कंगन रुपहला तब पहन।
तब सुनहला किस लिये पहना कड़ा॥