पृष्ठ:चित्रशाला भाग 2.djvu/४८

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20 चित्रशादा मोहन--स्वर, तुम कहते हो, इसलिये विश्वास किए लेता हूँ। स्यामा कहता हूँ, इसलिये ? मोहन-हाँ, और क्या ? श्यामा०-बर, मेरे कहने से ही सही ; किसी तरह तो विश्वास करो। मोहन०-चमेली के व्याद की तिथि तो ठीक हो गई। श्यामाचरण कुछ चौंक पड़े । कुछ सफिडों के लिये टनके मुख का वर्ण वेद हो गया ; परंतु वह सँभलकर बोले-कौन तिथि निश्चित हुई? मोहनः पापाद में केवल एक लगन कु. श्री तो है ही, वही निश्चित हुई है। श्यामा०--एक महीना समझो। मोहन०-हाँ, और क्या। श्यामा०-बड़ी प्रसन्नता को यात है। X मोहनलाल की बहन चमेली का विवाह है । मोहनलाल उसी में उत्तचित्त है । स्यामाचरण भी उन्हें काफी सहायता दे रहे हैं। मोइनकाल स्यामाचरण से बहुत प्रेम रखते हैं । श्यामाचरण की सजनता, टनके गुणों-विशेषकर उनकी सरलता क्या शुदद- यता-ने मोहन को मुग्ध कर लिया है। मोहन यदि संसार में किसी को अपना सच्चा मित्र समझते हैं, तो केवल श्यामाचरण श्यामाचरण के लिये वह सब कुछ करने को तैयार हो सकते है इधर श्यामाचरण भी मोइन से अत्यंत प्रेम रखते हैं। मोहन की मित्रता के कारण ही वह लखनक में केवल डेढ़ सौ मासिक वेतन पर पड़े हुए हैं। उन्हें बाहर ढाई-तीन सौ मासिक तक की नौकरी मिवती थी; पर ग्नाने नामंजूर कर दिया। मोहन ने कहा भी कि X