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दृश्य १ ]
चाँदी की डिबिया
 

लग गया होगा। वह यह समझ कर दिल में खुश हो रही थी, कि मैंने एक ग़रीब आदमी का उपकार किया। लेकिन मैं देख रहा था कि यह तांबे के ज़ीने पर खड़ी मुझे ताक रही थी, कि मैं उसका मोटा ताज़ा कुत्ता लेकर कहीं रफू चक्कर न हो जाऊँ।

[ वह चार पाई की पट्टी पर बैठ जाता है, और बूट पहिनता है। तब ऊपर ताक कर ]

तुम सोच क्या रही हो?

[ मिन्नत करके ]

क्या तुम्हारे मुंह में ज़बान नहीं है?

[ कुण्डी खटकती है, और घर की मालकिन मिसेज़ सेडन आती है। वह एक चिंतित, फूहड़ और जल्दबाज औरत है। मज़दूरों के से कपड़े पहिने हुए। ]

मिसेज़ जोन्स, जब तुम आई तब हमें तुम्हारी आहट मिल गई थी। मैंने अपने शौहर से कहा लेकिन वह कहते हैं कि मैं एक दिन के लिए भी नहीं मान सकता।

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