कमलिनी–-जरूर कहूँगी, बल्कि इस बात पर जोर भी दूंगी । अब यह बताइए कि नानक के लिए क्या हुक्म हुआ है ?
कुमार--केवल इतना ही, जन्म-भर के लिए कैदखाने भेज दिया जाये । बाकी के और कैदियों के लिए भी यही हुक्म हुआ !
किशोरी–-भीमसेन के लिए भी यही हुक्म हुआ होगा?
कुमार--नहीं, उसके लिए दूसरा ही हुक्म हुआ।
किशोरी--वह क्या?
कुमार--वह तुम्हारा भाई है, इसलिए हुक्म हुआ कि तुमसे पूछकर वह एकदम छोड़ दिया जाये, बल्कि शिवदत्तगढ़ की गद्दी पर बैठा दिया जाये।
किशोरी-—जब उसे छोड़ देने का ही हुक्म हुआ तो मुझसे पूछना कैमा !
कुमार—-यही कि शायद तुम उसे छोड़ना न चाहो, तो कैद में ही रखा जाये।
किशोरी--भला मैं इस बात को कब पसन्द करूंगी कि मेरा भाई जन्म-भर के लिये कैद रहे ? मगर हां, इतना खयाल जरूर है कि कहीं वह छूटने के बाद पुनः आपसे दुश्मनी न करे।
कुमार--खैर, अगर पुनः बदमाशी करेगा तो देखा जायेगा।
कमलिनी--(मुस्कराती हुई) उसके विषय में चपला चाची से पूछना चाहिये,क्योंकि वह असल में उन्हीं का कैदी है । जब सूअर के शिकार में उन्होंने उसे गिरफ्तार किया था, तो तरह-तरह की कसमें खिलाकर छोड़ा था कि भविष्य में पुनः दुश्मनी पर कमर न बांधेगा।
कुमार--बात तो ऐसी ही थी, मगर नहीं अब वह दुश्मनी का बर्ताव न करेगा।(किशोरी से) अगर कहो, तो तुम्हारे पास उसे बुलवाऊँ जो कुछ तुम्हें कहना-सुनना हो, कह सुन लो।
किशोरी--नहीं-नहीं, मैं बाज आई, मैं स्वप्न में भी उससे नहीं मिलना चाहती, जो कुछ उसकी किस्मत में लिखा होगा, सो भोगेगा।
कुमार--आखिर, उसे छोड़ने के विषय में तुमसे पूछा जायेगा, तो क्या जवाब दोगी?
किशोरी-—(कमलिनी की तरफ देखकर और मुस्कराकर) बस, कह दूंगी कि मेरे बदले चपला चाची से पूछ लिया जाये, क्योंकि वह उन्हीं का कैदी है ।
कुमार--खैर, इन बातों को जाने दो। (कमलिनी से) जमानिया तिलिस्म के अन्दर मायारानी और माधवी के मरने का सबब मुझे अभी तक मालूम न हुआ। इसका पता न लगा कि वे दोनों खुद मर गईं, या गोपाल भाई ने उन्हें मार डाला ! और अगर भाई साहब ने ही उन्हें मार डाला तो ऐसा क्यों किया ?
कमलिनी--इसका असल हाल तो मुझे भी मालूम नहीं है, मैंने दो दफे जीजाजी से इस विषय में पूछा था, मगर वह बात टालकर बतोला दे गये ।
1. देखिर चन्द्रकान्ता सन्तति पहला भाग, आठवां बयान ।