पृष्ठ:चंद्रकांता संतति भाग 6.djvu/१३९

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अब हम थोड़ा-सा हाल नानक और उसकी मां का बयान करते हैं जो हर तरफ से कसूरवार होने पर भी महाराज की आज्ञानुसार कैद किये जाने से बच गये और उन्हें केवल देश-निकाले का दण्ड दिया गया।

यद्यपि महाराज ने उन दोनों पर दया की और उन्हें छोड़ दिया, मगर यह बात सर्वसाधारण को पसन्द न आई। लोग यही कहते रहे कि 'यह काम महाराज ने अच्छा नहीं किया और इसका नतीजा बहुत बुरा निकलेगा।' आखिर ऐसा ही हुआ अर्थात् नानक ने इस अहसान को भूल कर फसाद करने और लोगों की जान लेने पर ही कमर बांधी।

जब नानक की माँ और नानक को देश-निकाले का हुक्म हो गया और इन्द्रदेव के आदमी इन दोनों को सरहद के पार करके लौट आये तब ये दोनों बहुत ही दुःखी और उदास हो एक पेड़ के नीचे बैठ कर सोचने लगे कि अब क्या करना चाहिए। उस समय सवेरा हो चुका था और सूर्य की लालिमा पूरब में आसमान पर फैल रही थी।

रामदेई–-कहो, अब क्या इरादा है ? हम लोग तो बड़ी मुसीबत में फंस गए !

नानक–बेशक मुसीबत में फंस गए और बिल्कुल कंगाल कर दिये गए । तुम्हारे जेवरों के साथ ही साथ मेरे हर्वे भी छीन लिए गये और हम इस लायक भी न रहे कि किसी ठिकाने पहुंच कर रोजी के लिए कुछ उद्योग कर सकते ।

रामदेई-ठीक है, मगर मैं समझती हूँ कि अगर हम लोग किसी तरह नन्हीं के यहां पहुँच जायँगे तो खाने का ठिकाना हो जायेगा और उससे किसी तरह की मदद भी ले सकेंगे।

नानक-नन्हीं के यहां जाने से क्या फायदा होगा? वह तो खुद गिरफ्तार होकर कैद की हवा खा रही होगी ! हाँ, उसका भतीजा बेशक बचा हुआ है जिसे उन लोगों ने छोड़ दिया और जो नन्हीं की जायदाद का मालिक बन बैठा होगा, मगर उससे किसी तरह की उम्मीद मुझको नहीं हो सकती।

रामदेई--ठीक है, मगर नन्हीं की लौंडियों में से दो-एक ऐसी हैं जिनसे मुझे मदद मिल सकती है।

नानक--मुझे इस बात की भी उम्मीद नहीं है, इसके अतिरिक्त वहाँ तक पहुंचने के लिए भी तो समय चाहिए, यहाँ तो शाम की भूख बुझाने को पल्ले में कुछ नहीं है।

रामदेई--ठीक है मगर क्या तुम अपने घर भी मुझे नहीं ले जा सकते? वहीं तो तुम्हारे पास रुपये-पैसे की कमी नहीं होगी!

नानक--हाँ, यह हो सकता है, वहां पहुंचने पर फिर मुझे किसी तरह की तक- लीफ नहीं हो सकती, मगर इस समय तो वहाँ तक पहुँचना भी कठिन हो रहा है। (लम्बी साँस लेकर) अफसोस, मेरा ऐयारी का बटुआ भी छीन लिया गया और हम लोग इस लायक भी नहीं रह गये कि किसी तरह सूरत बदल कर अपने को लोगों की आँखों से छिपा लेते।