पृष्ठ:चंद्रकांता संतति भाग 5.djvu/२२२

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नकाबपोश––(क्रोध से) क्या कहूँ, तू औरत है, तुझ पर हाथ छोड़ नहीं सकता, अगर कोई मर्द ऐसा बातें करता तो उसे ऐसी कहने का मजा चखा देता!

औरत––शायद मुझे धोखा हुआ हो मगर इसमें कोई शक नहीं कि जिसने इसे मारा है वह तुम्हारी ही तरह का था।

नकाबपोश––तू अपना और इसका हाल तो कह, शायद उससे कुछ पता लगे।

औरत––मैं इस जगह कुछ भी नहीं कहने की, अगर तुम उन लोगों में से नहीं हो जिन्होंने मुझे सताया है और असल मर्द हो, तो मुझे अपने सरदार के पास ले चलो, उसी जगह मैं सब हाल कहूँगी।

नकाबपोश––हमारे सरदार के पास तू नहीं जा सकती।

औरत––तो अब मुझे विश्वास हो गया जो कुछ किया सब तुम लोगों ने किया।

इसी तरह की बातें देर तक होती रहीं। यद्यपि वे दोनों नकाबपोश उस औरत को अपने सरदार के पास ले चलना या उसे अपना पता देना नहीं चाहते थे, मगर उस औरत ने ऐसी तीखी-तीखी बातें कहीं कि वे दोनों जोश में आ गए और उसे तथा उस लाश को उठाकर अपने खोह के मुहाने पर चलने के लिए तैयार हो गये। उन्होंने लाश उठाकर ले चलने में मदद करने के लिए उस गूँगे देहाती को इशारे में कहा, मगर उसने ऐसा करने से साफ इनकार किया बल्कि जब उन दोनों नकाबपोशों ने उसे डांटा तब वह डरकर वहाँ से भागा और कुछ दूर पर जाकर खड़ा हो गया।

फिर उन दोनों नकाबपोशों ने उस गूँगे से कुछ कहना उचित न जाना और जोश में आकर खुद लाश को उठाकर ले चलने के लिए तैयार हो गये, क्योंकि उन्हें इस बात का पूरा विश्वास था कि इस औरत की जुबानी जरूर कोई अनूठी बात सुनेंगे।

हम ऊपर बयान कर चुके हैं कि उस औरत की लाश भी फूलों के गहनों से भरी हुई थी, अब इतना और कह देना है कि उन फूलों पर बेहोशी की दवा इस ढंग पर छिड़की हुई थी कि कुछ मालूम नहीं होता था और खुशबू के सबब नकाबपोशों पर उसका कुछ असर हो चुका था मगर उन्हें इस बात का खयाल कुछ भी न था।

जब उन दोनों ने उस लाश को उठा लिया और फूलों की खुशबू को तेजी के साथ दिमाग में घुसने का मौका मिला, तब उन दोनों नकाबपोशों ने समझा कि हमारे साथ ऐयारी की गई। मगर अब कर ही क्या सकते थे? तुरत सिर में चक्कर आने लगा जिसके सबब से वे दोनों बैठ गये और साथ ही इसके बेहोश होकर जमीन पर लम्बे हो गये। उसी समय औरत की लाश भी चैतन्य हो गई और वह देहाती गूँगा भी उनकी खोपड़ी पर आ मौजूद हुआ। उस औरत ने देहाती गूँगे से कहा, "अब क्या करना चाहिए?"

देहाती––बस अब हमारा काम हो गया, अब इन्हें मालूम हो जायगा कि भूतनाथ कोई साधारण ऐयार नहीं है।

औरत––मगर अब भी आपको इस बात के सोचने का मौका है कि नकाबपोश लोग आपसे रंज न हो जायं और इस बखेड़े का नतीजा बुरा न निकले।

देहाती––इन बातों को मैं खूब सोच चुका हूँ। उन दोनों नकाबपोशों को जो