पृष्ठ:चंद्रकांता संतति भाग 3.djvu/२००

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कि आप लोगों में से कोई एक आदमी मेरे साथ चले, मैं असली बलभद्रसिह को जो वास्तव में लक्ष्मीदेवी का बाप है और अभी तक कैदखाने में पड़ा हुआ है दिखला दूंगा। मैं सच कहता हूँ कि उस कागज के मुठ्ठे में जो कुछ लिखा हुआ है यदि उसमें किसी तरह की मेरी बुराई है तो बिल्कुल झूठ है।

देवीसिंह-मैं केवल तुम्हारे इतना कहने पर क्योंकर विश्वास कर सकता हूँ? मैं तुम्हारे अक्षर अच्छी तरह पहचानता हूँ जो उस कागज के मुट्ठ की लिखावट से बखूबी मिलते हैं। खैर इसे भी जाने दो, मैं यह पूछता हूँ कि बलभद्रसिंह को वहाँ देखकर तुम इतना डरे क्यों? यहाँ तक कि डर ने तुम्हें बेहोश कर दिया!

भूतनाथ-यह तो तुम जानते ही हो कि मैं उससे डरता हूँ, मगर इस सबब से नहीं डरता कि वह कमलिनी का बाप बलभद्रसिंह है, बल्कि उससे डरने का कोई दूसरा ही सबब है जिसके विषय में मैं कह चका हूँ कि आप मुझसे न पूछेगे और यदि किसा तरह मालूम हो जाय तो बिना मुझसे पूछे किसी पर प्रकट न करेंगे।

देवीसिंह-अच्छा इस बात का जवाब तो दो कि अगर तुम्हें यह मालूम था कि कमलिनी का बाप किसी जगह कैद है और तारा वास्तव में लक्ष्मीदेवी है जैसा कि तुम इस समय कह रहे हो तो आज तक तमने कमलिनी को इस बात की खबर क्यो न दा। या यह बात क्यों न कही कि 'मायारानी वास्तव में तुम्हारी बहिन नहीं है।

भूतनाथ-इसका सबब यही था कि असली बलभद्रसिंह ने जो अभी तक कैद है और जिसके छडाने की मैं फिक्र कर रहा है मझसे कसम ले ली है कि जब तक ११५ से न छटें, मैं उनके और लक्ष्मीदेवी के विषय में किसी से कुछ न कहूँ और वास्तव में अगर मुझ पर इतनी विपत्ति न आ पड़ती तो मैं किसी से कहता भी नहीं। मुझ इस बात का बड़ा ही दुःख है कि मैं तो अपनी जान हथेली पर रखकर आप लोगों का काम करूँ और आप लोग बिना समझे-बूझे और असल बात को बिना जांचे दूध की मक्खा की तरह मुझे निकाल फेंकें। क्या मुरौवत नेकी और धर्म इसी को कहते हैं? क्या यही जवाँमर्दो का काम है? आखिर मुझ पर इलजाम तो लग ही चका था, मगर मेरी और उस दुष्ट की, जो कमलिनी का बाप बन के मकान के अन्दर बैठा हुआ है, दो-दो बात तो हो लेने देते।

भूतनाथ की बात सुनकर देवीसिंह को बड़ा ही आश्चर्य हुआ और वह कुछ देर तक सिर नीचा किए हुए सोचते रहे, इसके बाद कुछ याद करके बोले, "अच्छा मेरी एक बात का जवाब दो।"

भूतनाथ-पूछिए।

देवीसिंह-यदि तुम्हें उस कागज के मुटे से कुछ डर न था और वास्तव में जो कुछ उस मुटे में तुम्हारे खिलाफ लिखा हुआ है वह झूठ है जैसा कि तुम अभी कह चुके हो तो तुम उस गठरी को देख के उस समय क्यों डरे थे जब बलभद्रसिंह ने रात के समय उस जंगल में तुम्हें वह गठरी दिखाई थी और पूछा था कि यदि कहाँ तो भगवानी के सामने इसे खोलूँ? मैं सुन चुका है कि उस समय इस गठरी को देखकर तुम कॉप गये थे और नहीं चाहते थे कि भगवानी के सामने वह खोली जाय!