पृष्ठ:चंद्रकांता संतति भाग 3.djvu/१२७

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गौर से उस चक्र को देख रही थी कि आदमियों के शोरगुल की आवाजें आने लगीं। तारा समझ गई कि दुश्मन पास आ गये। उसने किशोरी और कामिनी की तरफ देखके कहा, “बहिनो, अब तीन पुतलियाँ और रह गई हैं, हमें उन्हें भी झटपट झुका देना चाहिए क्योंकि दुश्मन आ पहुँचे। एक पुतली को तो मैं झुकाती हूँ और दो पुतलियों को तुम दोनों झुका दो, फिर छत पर चल कर देखो तो सही ईश्वर क्या करता है और इन दुश्मनों की क्या अवस्था होती है।

तीनों पुतलियों का झुकाना थोड़ी देर का काम था जो किशोरी, कामिनी और तारा ने कर दिया और इसके बाद तीनों छत के ऊपर चढ़ गईं। तारा काम किया अर्थात् कमान और बहुत से तीर भी अपने साथ छत के ऊपर लेती गईं।

चारों पुतलियों के झुक जाने से जल में बहुत ज्यादा खलबली पैदा हुई, मालूम होता था कि जल तेजी के साथ मथा जा रहा है जिससे झाग और फेन पैदा हो रहा था।

अपने यहाँ की लौंडियों और नौकरों को कुछ समझाकर कामिनी तथा किशोरी को साथ लिए हुए तारा छत के ऊपर चढ़ गई और वहाँ से जब दुश्मनों की तरफ देखा तो मालूम हुआ कि वे लोग, जो गिनती में चार सौ से किसी तरह कम न होंगे, तालाब के पास पहुँच गये हैं और तालाब के खौलते हुए जल तथा उस एक चक्र को, जो इस समय जल के बाहर निकला हुआ तेजी के साथ घूम रहा था, हैरत की निगाह से देख रहे हैं।

तारा―किशोरी बहिन देखो, अगर इस समय उन चारों पुतलियों का हाल मालूम न होता तो हम लोगों की तबाही में कुछ बाकी न था!

किशोरी―बेशक इस समय तो उन चारों चक्रों ही ने हम लोगों की जान बचा ली। दुश्मन लोग इस समय उन चक्रों को आश्चर्य से ही देख रहे हैं और इस तरफ कदम बढ़ाने की हिम्मत नहीं करते।

कामिनी―मगर हम लोग कव तक इस अवस्था में रह सकते हैं? क्या वे चारों चक्र इसी तरह बहुत दिनों तक घूमते रह सकते हैं?

तारा―हाँ, अगर हम लोग स्वयं न रोक दें तो एक महीने तक बराबर घूमते रहेंगे, इसके बाद इन चक्रों के घुमाने के लिए कोई दूसरी तरकीब करनी होगी जो मुझे मालूम नहीं।

किशोरी―अगर ऐसा है तो महीने भर तक हम लोग बेखौफ रह सकते हैं, और क्या इस बीच में हमारी मदद करने वाला कोई भी नहीं पहुँचेगा?

तारा―क्यों नहीं पहुँचेगा! मान लिया जाय कि हमारा साथी इस बीच में कोई न आवे तो भी रोहतासगढ़ से मदद जरूर आवेगी, क्योंकि यह जमीन रोहतासगढ़ की अमलदारी में है और रोहतासगढ़ यहाँ से बहुत दूर भी नहीं है, अस्तु ऐसा नहीं हो सकता कि राजा की अमलदारी में इतने आदमी मिलकर उपद्रव मचावें और राजा को कुछ खबर न हो।

कामिनी―ठीक है मगर यह तो कहो कि बहुत दिनों तक काम चलाने के लिए गल्ला इस मकान में है?