पृष्ठ:चंद्रकांता संतति भाग 2.djvu/४१

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उठा, इसके बाद उस औरत ने कहा––

राक्षसी––ऐसा कौन है जिसे मैं नहीं पहचानती होऊँ? खैर, इन बातों से कोई मतलब नहीं। यह कहो कि अपने मालिकों के छुड़ाने की तुम क्या फिक्र कर रहे हो? दिग्विजयसिंह दो ही तीन दिन में तुम्हारे मालिक को मार कर निश्चिन्त होना चाहता है।

भैरोंसिंह उस राक्षसी से बातें करने को तैयार थे, परन्तु यह नहीं जानते थे कि वह इनकी दोस्त है या दुश्मन, और उससे अपने भेदों को छिपाना चाहिए कि नहीं। यह सोच ही रहे थे कि इसकी बातों का क्या जवाब दिया जाय कि इतने में कई आदमियों के आने की आहट मालूम हुई। उस औरत ने घूमकर देखा तो चार आदमियों को इसी तरफ आते पाया। उन पर निगाह पड़ते ही वह क्रोध में आकर गरजी और नेजे को हिलाती हुई उसी तरफ लपकी। नेजे की चमक ने उन चारों की आँखें बन्द कर दीं। औरत ने बड़ी फुर्ती से उन चारों को नेजे से घायल कर दिया। हिलाने के साथ-ही-साथ उस नेजे में गजब की चमक पैदा होती थी, मालूम होता था कि आँखों के आगे बिजली दौड़ गई। वे बेचारे देख भी न सके कि उनको मारने वाला कौन है या कहाँ पर है। मालूम होता है कि वह नेजा जहर में बुझाया हुआ था क्योंकि वे चारों जख्मी होकर तुरंत जमीन पर ऐसे गिरे कि फिर उठने की नौबत न आई।

इस तमाशे को देखकर भैरोंसिंह डरे और सोचने लगे कि इस औरत के हाथ में तो बड़ा विचित्र नेजा है। इससे तो यह बात-की-बात में सैकड़ों आदमियों का नाश कर सकती है। कहीं ऐसा न हो कि हम लोगों को भी सतावे।

उन चारों को जख्मी करने के बाद वह औरत फिर भैरोंसिंह की तरफ लौटी। अब उसने अपने नेजे को आड़ा किया अर्थात् उसे इस तरह थामा कि उसका एक सिरा बाईं तरफ और दूसरा दाहिनी तरफ रहे, तब तीनों ऐयारों और कमला को नेजे का धक्का देकर एक साथ पीछे की तरफ हटाना चाहा। यह नेजा एक साथ चारों के बदन में लगा। उसके छूते ही बदन में एक तरह की झनझनाहट पैदा हुई और सब आदमी बदहवास होकर जमीन पर गिर पड़े।

जब उन चारों––अर्थात् भैरोंसिंह, रामनारायण, चुन्नीलाल और कमला––की आँखें खुलीं, तो उन्होंने अपने को किले के अन्दर राजमहल के पिछवाड़े की तरफ एक दीवार की आड़ में पड़े पाया। उस समय सुबह की सफेदी आसमान पर धीरे-धीरे अपना दखल जमा रही थी।


8

बहुत दिनों से कामिनी का हाल कुछ भी मालूम न हुआ। आज उसकी सुध लेना भी मुनासिब है। आपको याद होगा कि जब कामिनी को साथ लेकर कमला अपने चाचा शेरसिंह से मिलने के लिए उजाड़ खँडहर और तहखाने में गई थी तो वहाँ से बिदा होते