पृष्ठ:चंद्रकांता संतति भाग 1.djvu/७६

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किशोरी-उन्होंने क्या कहा है?

कमला—यों तो वे मेरे सामने बहुत-कुछ बक गये, मगर असल मतलब उनका यही है कि तुम चुपचाप चुनार उनके पास बहुत जल्द पहुँच जाओ।

किशोरी—(देर तक सोचकर) मैं तो अभी चुनार जाने को तैयार हूँ, मगर इस में बड़ी हँसाई होगी।

कमला–अगर तुम हँसाई का खयाल करोगी तो बस हो चुका, क्योंकि तुम्हारे माँ-बाप इन्द्रजीतसिंह के पूर दुश्मन हो रहे हैं, जो तुम चाहती हो उसे वे खुशी से कभी मंजूर न करेंगे। आखिर जब तुम अपने मन की करोगी तभी लोग हँसेंगे, ऐसा ही है तो इन्द्रजीतसिंह का ध्यान दिल से दूर करो या फिर बदनामी कबूल करो।

किशोरी-तुम सच कहती हो। एक न एक दिन बदनामी होनी ही है, क्योंकि इन्द्रजीतसिंह को मैं किसी तरह भूल नहीं सकती। आखिर तुम्हारी क्या राय है?

कमला-सखी, मैं तो यही कहूँगी कि अगर तुम इन्द्रजीतसिंह को नहीं भूल सकतीं तो उनसे मिलने के लिए इससे बढ़कर कोई दूसरा मौका तुम्हें न मिलेगा। चुनार में जाकर बैठी रहोगी तो कोई भी तुम्हारा कुछ बिगाड़ न सकेगा। आज कौन ऐसा है जो महाराज वीरेन्द्रसिंह से मुकाबला करने का साहस रखता हो? तुम्हारे पिता अगर ऐसा करते हैं तो यह उनकी भूल है। आज सुरेन्द्रसिंह के खानदान का सितारा बड़ी तेजी से आसमान पर चमक रहा है और उनसे दुश्मनी का दावा करना अपने को मिट्टी में मिला देना है।

किशोरी–ठीक है, मगर इस तरह वहाँ चले जाने से इन्द्रजीतसिंह के बड़े लोग कब खुश होंगे?

कमला-नहीं-नहीं, ऐसा मत सोचो। क्योंकि तुम्हारी और इन्द्रजीतसिंह की मुहब्बत का हाल वहाँ किसी से छिपा नहीं है। सभी लोग जानते हैं कि इन्द्रजीतसिंह तुम्हारे बिना जी नहीं सकते, फिर उन लोगों को इन्द्रजीतसिंह से कितनी मुहब्बत है यह तुम खुद जानती हो। अस्तु; ऐसी दशा में वे लोग तुम्हारे जाने से कब नाखुश हो सकते हैं। दूसरे, दुश्मन की लड़की अपने घर में आ जाने से वे लोग अपनी जीत समझेंगे। मुझे महारानी चन्द्रकान्ता ने खुद कहा था कि जिस तरह बने तुम समझा-बुझाकर किशोरी को ले आओ, बल्कि उन्होंने अपनी खास सवारी का रथ और कई लौंडी-गुलाम भी मेरे साथ भेजे हैं!

किशोरी-(चौंककर) क्या उन लोगों को अपने साथ लाई हो?

कमला-हाँ, जब महारानी चन्द्रकान्ता की इतनी मुहब्बत तुम पर देखी, तभी तो मैं भी वहाँ चलने के लिए राय देती हूँ।

किशोरी-अगर ऐसा है तो मैं किसी तरह रुक नहीं सकती, अभी तुम्हारे साथ चली चलूँगी, मगर देखो सखी, तुम्हें बराबर मेरे साथ रहना पड़ेगा।

कमला-भला मैं कभी तुम्हारा साथ छोड़ सकती हूँ!

किशोरी-अच्छा, तो यहाँ किसी से कुछ कहना-सुनना तो है नहीं?

कमला-किसी से कुछ कहने की जरूरत नहीं, बल्कि तुम्हारी इन सखियों और

च॰-स॰1-2