पृष्ठ:चंद्रकांता संतति भाग 1.djvu/२२०

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और नानक से बोली-

औरत—अब तू मेरे पीछे-पीछे क्यों घूम रहा है? जहाँ तेरा जी चाहे, जा और अपना काम कर। व्यर्थ समय क्यों नष्ट करता है? अब तुझे तेरी रामभोली किसी तरह नहीं मिल सकती, उसका ध्यान अपने दिल से दूर कर दे।

नानकप्रसाद-रामभोली झख मारेगी और मेरे पास आवेगी, वह मेरे कब्जे में है। उसकी एक ऐसी चीज मेरे पास है जिसे वह जीते-जी कभी नहीं छोड़ सकती।

औरत-(हँस कर) इसमें कोई शक नहीं कि तू पागल है। तेरी बातें सुनने से हँसी आती है। खैर तू जान तेरा काम जाने, मुझे इससे क्या मतलब!

इतना कहकर उस औरत ने कुएँ में झाँका और पुकार कर कहा, "कूपदेव, मुझे प्यास लगी है, जरा पानी तो पिलाना।"

औरत को बात सुनकर नानक घबराया और जी में सोचने लगा कि यह अजब औरत है जो कुएँ पर हुकूमत चलाती है और कहती है कि मुझे पानी पिला। यह औरत मुझे पागल कहती है, मगर मैं इसी को पागल समझता हूँ, भला कुआँ इसे क्योंकर पानी पिलायेगा? जो हो, मगर यह औरत बहुत खूबसूरत है और इसका गाना भी बहुत ही उम्दा है।

नानक इन बातों को सोच ही रहा था कि कोई चीज देख कर चौंक पड़ा, बल्कि घबरा कर उठ खड़ा हुआ और काँपते हुए तथा डरी हुई सुरत से कुएँ की तरफ देखने लगा। वह एक हाथ था जो चाँदी के कटोरे में साफ और ठंडा जल लिये हुए कुएँ के अन्दर से निकला और इसी को देखकर नानक घबरा गया था।

वह हाथ किनारे पर आया, उस औरत ने कटोरा ले लिया और जल पीने के बाद कटोरा उसी हाथ पर रख दिया, हाथ कुएँ के अन्दर चला गया और वह औरत फिर उसी तरह गाने लगी। नानक ने अपने जी में कहा, 'नहीं-नहीं, यह औरत पागल नहीं, बल्कि मैं ही पागल हूँ, क्योंकि इसे अभी तक न पहचान सका। बेशक यह कोई गन्धर्वी या अप्सरा है, नहीं-नहीं, देवता है जो रूप बदल कर आई है तभी तो इसके बदन में इतनी ताकत है कि मेरी कलाई पकड़ और झटका देकर इसने तलवार गिरा दी। मगर रामभोली से इसका परिचय कहाँ हुआ?"

गाते-गाते यकायक ही वह औरत उठ खड़ी हुई और बड़े जोर से चिल्लाकर उसी कुएं में कूद पड़ी।

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लाल पोशाक वाली औरत की अद्भुत बातों ने नानक को हैरान कर दिया। वह घबराकर चारों तरफ देखने लगा और डर के मारे उसकी अजब हालत हो गई। वह उस कएँ पर भी ठहर न सका और जल्दी-जल्दी कदम बढ़ाता हुआ इस उम्मीद में

च॰स॰-1-13