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छठा अध्याय महात्माजी की चेतावनी यह कहा जा चुका है कि सन् १९२८ की कलकत्ता-कांग्रेस में महात्मा गांधी ने सरकार को एक अल्टीमेटम दिया था-"आज से १ साल के अंदर-अंदर यदि सरकार 'नेहरू-रिपोर्ट के अधि- कार हमें प्रदान न कर देगी, तो अवधि समाप्त हो जाने पर भारत 'पूर्ण स्वाधीनता' के सिवा और कुछ न चाहेगा, और अपने अहिंसात्मक असहयोग-आंदोलन को शक्ति-भर आरंभ कर देगा।" इस 'अल्टीमेटम' को कलकत्ता-कांग्रेस ने स्वीकृत कर लिया था । इसके बाद नेता लोग साल-भर तक देश की स्थिति सुधारते रहे, और सरकार की ओर से अल्टीमेटम के उत्तरं की प्रतीक्षा करते रहे । लेकिन वह तो चुप थी । आखिर सन् २६ की लाहौर-कांग्रेस ने अपने प्रस्तावानुसार पूर्ण स्वाधी- नता की घोषणा कर दी, और निश्चय कर लिया कि किसी भी आशा में न रहकर अब अहिंसात्मक युद्ध प्रारंभ किया जाय । महात्मा गांधी ने इस युद्ध के नेतृत्व की मांग की, और कांग्रेस ने उन्हें इसका अधिकार दे दिया । अब महात्माजी ने इस युद्ध की तैयारियां की। ये तैयारियाँ वास्तव में अलौकिक थीं । युद्ध- प्रस्थान के पहले उन्होंने सरकार को चेतावनी देना निश्चय किया,