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गोल-सभा मृत्यु के समय आपके पास आपकी धर्म-पत्नी, पुत्री, दोनो जामाता और बड़े भाई मौलाना शौकतअली उपस्थित थे। उनकी धर्म-पत्नी ने इंगलैंड में पर्दा उठा दिया था। इस विषय में मौलाना ने पत्र-प्रतिनिधि से कहा था कि "मेरी पत्नी, जो एक शब्द भी विदेशी भाषा का नहीं बोल सकती, आज पहली बार पर्द को उठाकर मेरी सेवा करने मेरे साथ आई हैं ।" अपनी मृत्यु से थोड़ी देर पहले मौलाना ने, सांप्रदायिकता के संहार के लिये, जो पत्र लिखा था, उसमें कहा था कि व्यवस्थापिका सभा के प्रत्येक सदस्य को अपने समाज के अतिरिक्त दूसरी जातिवालों के मत भी, एक निदिष्ट संख्या में, प्राप्त करना जरूरी माना जाय । पत्र में यह भी घोषित किया था कि यदि मुसलमानों-सहित भारतवर्ष को स्वाधीनता न मिली तो मुसलमान भी राष्ट्रीय आंदोलन में शामिल हो जायँगे- “We want to go back not just with separate electorates with weightage but with freedom for India including freedom for Musalmans. And unless we secure that I can assure the Premier that Musalmans will join the Civil Disobedience Movement without the least hesitation." इस प्रकार मौलाना ने सांप्रदायिकता के संहार का उपाय किया जाना बताया। "