पृष्ठ:गुप्त-निबन्धावली.djvu/४

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निवेदन “गुम-निबन्धावली” का प्रथम संस्करण बाबू बालमुकुन्दजी गुप्तका देहावसान होनेके पांच वर्ष बाद, अबसे प्रायः ३७ वर्ष पूर्व, पण्डित अम्बिकाप्रसादजी वाजपेयी द्वारा सम्पादित होकर भारतमित्र कार्यालयसे प्रकाशित हुआ था। उसमें गुप्तजीके उर्दू और हिन्दी समाचार-पत्रोंके इतिहास विषयक लेखों के अतिरिक्त “भाषाकी अनस्थिरता" वाले केवल १० निबन्ध हो समाविष्ट किये गये थे। उनके विभिन्न विषयक अवशिष्ट लेखोंको दूसरे भागमें प्रकाशित करनेका विचार था, किन्तु दूसरा भाग प्रकाशित होनेका अवसर ही नहीं आया। आगे चलकर 'भारतमित्र' भी कालके गालमें समा गया। ___ स्वर्गीय गुप्तजीके लेखोंको उनकी सरसता और सजीवताके कारण आज भी हिन्दी साहित्यानुरागी-समुदाय पढ़नेके लिये उत्कण्ठित है, किन्तु वे अप्राप्य हैं। 'गुप्त-निबन्धावली' के प्रकाशित होनेके पूर्व गुप्तजीकी रचनाओंमें से 'शिवशंभुके चिट्टे' और 'स्फुट कविता' पुस्तकाकार छप चुकी थीं। 'रत्नावली नाटिका' तथा 'हरिदास' नामकी दो पुस्तक गुप्तजीने संस्कृत तथा बङ्ग भाषासे उल्था करके प्रकाशित करायीं थीं। उन्होंने ब्रजभाषाके प्रसिद्ध कवि नन्ददासजीकी दो कविताओंका संग्रह भी “रास पंचाध्यायी' के नामसे अपनी भूमिकाके साथ छपाकर 'भारतमित्र' के उपहारमें दिया था। इन सबकी मांग होनेपर भी आज वे नहीं मिलती। ____ गत वर्ष कर्तव्यानुरोधसे जब हम स्वर्गीय गुप्तजीकी स्मृतिमें उनकी विस्तृत जीवनी तथा संस्मरणोंके साथ एक "स्मारक ग्रन्थ" प्रस्तुत करनेको कृतसंकल्प हुए, तब हमें सबसे पहले उनकी अमर कृतियोंका संग्रह हिन्दी-संसारके समक्ष रखनेकी आवश्यकता प्रतीत हुई और तदनु