पृष्ठ:गीतारहस्य अथवा कर्मयोगशास्त्र.djvu/६२५

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५८६ गीतारहत्य अथवा कर्मयोग-परिशिष्ट। अन्यकारों के ही मतानुसार, श्रीकृष्ण-प्रणीत गीता ही के कारण हुआ है । गीता के बहुतेरे सिद्धांत ईसाइयों की नई याइबल में भी देखे जाते हैं। बस, इसी बुनि. याद पर कई क्रिश्चियन ग्रन्थों में यह प्रतिपादन रहता है कि ईसाईन्धन के ये तत्व गीता में ले लिये गये होंगे, और विशेषत: दापटर क्षारिनसर ने गीता के टस जर्मन नापानुवाद में-कि जो सन् १८६ ईसवी में प्रकाशित हुआ था जो कुछ प्रदिपादन किया है उसका निर्मूलत्व अब पापही पार सिद्ध हो जाता है । लारिनसर ने अपनी पुस्तक के (गीता के जर्मन अनुवाद के) अन्त में भगवद्गीता और बाइबल-विशेष कर नई बाइबल के शब्द-सादृश्य के कोई एक सौ से अधिक स्थल बतलाये है मौर उनमें से कुछ तो विलक्षमा एवं ध्यान देने योग्य भी हैं । एक उदाहरण नीजिये, सस दिन तुम जानोगे कि मैं अपने पिता में, तुन मुकने और मैं तुम में हूँ" (जान. १४. २०), यह वाक्य गीता के नीचे लिख हुर वाक्यों से समानार्थक ही नहीं है, प्रत्युत शब्दशः भी एक ही है। वे वाक्य ये है:-" येन भूतान्यशेपेण इश्यस्यासन्ययो नवि" (गीता १.३५) और "यो मां परपति सर्वत्र सर्व । मयि पश्यति " (गी. ६.३०)। इली प्रकार जान का भागे का यह वाक्य मी "जो मुझ पर प्रेम करता है उसी पर मैं प्रेम करता है- (११.२३), गीता के "प्रियो दि ज्ञानिनोऽन्यर्थ भई सच मम प्रियः" (गी. ७. १७)वाश्य के विल- कुल ही सश है। इनकी, तथा इन्हीं से मिलते-जुलते हुए कुछ एक से ही वाक्यों की, पुनियाद पर डाक्टर लारिनसर ने अनुमान करके कह दिया है कि गीता-प्रन्यकार घाइवल से परिचित थे, और ईसा के लगभग पांच सौ चपा के पीछे गीता बनी होगी। डा. लारिनलर की पुस्तक के इस भाग का अंग्रेजी अनुवाद 'इंडियन एंटि- छेरी' की दूसरी पुस्तक में उस समय प्रकाशित हुना था। और परलोकवासी तेलंग ने भगवद्वीता का जो पद्यात्मक अंग्रेजी अनुवाद किया है उसकी प्रस्तावना टन्होंने लारिनसर के मत का पूर्णतया खंडन किया है। डा. लारिनतर पश्चिमी संस्कृतज्ञ पण्डितों में न लेखे जाते थे, और संस्कृत की अपेक्षा उन्हें ईसाईधर्म का ज्ञान तथा अमिमान कहीं अधिक था। अतएव उनकै मत, न केवल परलोकवासी लंग ही को, किन्तु मेक्समूलर प्रति मुख्य मुख्य पश्चिमी संस्कृतज्ञ पण्डितों को भी अग्राह्य हो गये थे । वेचार लारिनसर को यह कल्पना भी न हुई होगी कि ज्यों ही एक धार गीता का समय ईसा से प्रपन निस्सन्दिग्ध निश्चित हो गया, साँही गीता और वाइदल के जो लकड़ों अर्थ-सादृश्य और शब्द-सादृश्य मैं दिसला रहा है ये, मूतों के समान, उलटे मेरे ही गले ले पा लिपटेंगे। परन्तु इसमें सन्देह नहीं कि जो वात कमी स्वम में भी नहीं देख पड़ती, वही कमी कमी आँखों के सामने नाचने लगती है और सचमुच देखा जाय, तो अब डाक्टर लादिनसर को उत्तर देने की See Bhagavadgith translated into English Blank Verse with Notes &c. by K. T. Telang 1875, (Bombay). This book is dif- ferent from the translation in tte S. B, E. series. .