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सात खून


किसी चीज की ठाकर लगा! यह जान कर मैन धर्मों को ओर देखा तो क्या देखा कि, 'अबदुल्ला का सिर मेरे पैर की ठोकर खाकर दरवाजे के चौखट तक लुढ़क गया है!' यह देखकर मेरे सारे बदन के रोंगटे खड़े होगए और बड़े जोर जोर से कलेजा उछलने लगा! फिर मैं जहां की तहां खड़ी की खड़ी रह गई और मेरे पैरों में चलने से जवाब दे दिया! इतने ही में मेरी नजर उस तख्तेपोश की ओर गई तो मैं क्या भयङ्कर दृश्य देखा कि, अबदुल्ला का बिना सिर का धड़ पड़ा हुआ है और उसके हाथ वाली तल्वार हींगन के कलेजे में घुसी हुई है ! हींगन भी मुंह पाए हुए मरा पड़ा है और उसके हाथ से छूट कर तल्वार तख्त पर गिर गई है ! सारा तख्तेपोश खून से भर गया है और नीचे धर्ती में भी बहुत सा खून बह गया है !' इतने ही में मैंने अपनी ऊनी चादर फी ओर देखा तो उसमें भी खून लगा दिखाई दिया! केवल इतना ही नहीं; यरन मेरी धोती की लावन ( नीचे के किनारे ) में भी खून लग रहा था और मेरा पैर भी खून से रंग गया था, क्योंकि कोठरी में खून वहा था कि नहीं!

हाय, इस भयङ्कर दृश्य को देखकर मेरे तो होश उड़ गए और देर तक मैं उसी कोठरी में खड़ी खड़ी पगली की तरह इधर उधर निहारती रही । इतगे ही में एकाएक नजाने मेरे मन में क्या तरङ्ग उठी कि घट दौड़कर मैं उस फोठरी से बाहर निकल भगी। उस समय भी मुझे अबदुल्ला के सिर को ठोकर लगी थी, क्योंकि यह लुढ़क कर दरवाजे के बीचों बीच आकर ठहर गया था!

अस्तु, फिर मैं उस खयाल को छोड़कर इस ओर लपकी, जिधर वह कोठरी थी, जिसमें कि ये छओं चौकीदार रहते थे। तो, मैं उन चौकीदारों को कोठरी की ओर क्यों चली ? इसलिये कि मैं भागना नहीं चाहती थी, क्योंकि इस संसार में मेरे लिये ऐसी कोई जगह न थी, जहां पर जाकर मैं छिपसकती और