पृष्ठ:खूनी औरत का सात ख़ून.djvu/४५

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सात खून ।


जल्दी भीतर जाओ; क्योंकि दुलारी जाग पड़ी है और उसने हिरवा को पछाड़ कर उसका गला दधा लिया है।' यह सुनकर हमलोगों ने उसे तो उसके घर बिदा कर दिया और घटपट मैने तुम्हारे घर की भूसा ढोने वाली गाड़ी में तुम्हारे ही दो बैल जोत फर तुम्हें यहांले भगा लेजाने का विचार किया। जब गाड़ी ठीक होगई और हमलोग भी तयार गए, सो नब्बू ने एक पलोता पाल लिया और हमसब इस कोठरी में पाए । यहां आकर हमलोगों ने क्या देखा कि, 'हिरवा तो मरा हुशा पड़ा है. गौर उसीके पास तुम भी बेसुध पड़ी हुई हो !' यह हाल देखकर हमलोग बड़े चक्रपकाए कि तुम्हारे नाजुक हाथों गे उस हव. कोषहिरवा की जाम कैसे ले डालो ! खैर, फिर तो खुद मैगे तुम्हें उठाकर इसी चारपाई पर डाल दिया और साथ ही तुम्हारे हाथों और पैरों को भी मजबूती के साथ फसफर पौध दिया । बस, यही तो असल बात थी, जिसे मैंने तुम्हें सुना दिया । अश्व यह कहो, कि तुम्हारा पमा इरादा है ? तुम सोधो तरह हमलोगों के साथ चलोगी, या जोर-जबर्दस्तो करने से ?"

कालू की इस ढव की बातें सुनकर मैं कांप उठी, बहुत ही डर गई और मन ही मन यही बात सोचने लगी कि अब मेरी खैर नही है ! पर फिर भी मन ही मन भगवान का स्मरण करके मैने कोई बात ठीक की और कालू की ओर देखकर यों कहा,-" तो तुम्हारे बतलाए हुए और बाकी के सात साथी कहां है ?"

यह सुनकर कालू ने कहा,--"वे सब पलेग के डर से इधर उधर भाग गए हैं। इस समय हम पाच हो आदमी इस गांव में रह गए थे, जिनमें से हिरवा बेचारे को तो तुममे गला घोंट कर मार ही डाला ! बस,अब हम्ही चार यार हैं, जो तुम्हें अभी-इसीदम यहां से कहीं दूमरी जगह ले जाया चाहते हैं । यदि तुम राजो-खुसी से चलो, तब तो बहुत ही अच्छो यात है; पर जो तुम यों न मानोगो