पृष्ठ:खूनी औरत का सात ख़ून.djvu/१८४

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उपन्यासों का सूचीपत्र


*मल्लिकादेवी वा वंगसरोजिनी*
ऐतिहासिक उपन्यास....मूल्य सवा रुपया।

इस उपन्यास में बंगदेश की उस समय की घटना का वर्णन बड़ी उत्तमता से किया गया है, जब दिल्ली के तख्त पर नेकनाम बादशाह गयासुद्दीन बलवन विराजमान था और बंगालेकी बागडाेर एक महा अत्याचारी तुगरलख़ां जैसे निर्दय नव्वाब के हाथ में थी।

इतिहास के जानने वाले जानते होंगे कि सन् १२७९ ई° में बंगदेश में बड़ा भारी उलट फेर हुआ था। उन दिनों बंगदेश का महा अत्याचारी नव्वाब तुगरलख़ां (मगसुद्दीन) था। उसके दमन करने के लिये दिल्ली के सदाशय बादशाह गयासुद्दीन बलवन आए। थे। भागलपुर के महाराज महेन्द्रसिंह, उनकी महारानी, प्रधानमंत्री वीरेन्द्रसिंह, गुप्तसचिव यदुनाथसिंह इत्यादि को तुगरल ने एक कुदरती पहाड़ी के अन्दर कैद कर लिया था, जिसका हाल किसी को विदित न था।महेन्द्रसिंह के पुत्र नरेन्द्रसिंह, वीरेन्द्रसिंह के भतीजे विनोदसिंह आदि के ऊपर भी तुगरल ने बड़ा चक्र चलाया था, पर अन्त का यदुनाथसिंह की पुत्री मालती ने, जो यवनवेश में फरहाद नाम धर कर तुगरल के यहां रहती थी, इस रहस्य को खोला और महाराज महेन्द्रसिंह आदि को कैद से छुड़ाया।

इस षड्यन्त्र में यदुनाथसिंह का छोटा भाई रघुनाथसिंह लिप्त था। सो वह आत्मग्लानि से घर छोड़ कर भागा और उसने तुगरल को मार डाला। तुगरल की कन्या शीरी से बादशाह गयासुद्दीन बलवन के पुत्र शाहज़ादे नासिरुद्दीन मुहम्मद का विवाह हुआ, जो तुगरल के बाद बंगदेश का नवाब बनाया गया था। किर नरेन्द्रसिंह के साथ बीरन्द्रसिंह की लड़की मल्लिका और यदुनाथसिंह की पुत्री मालती का विवाह हुआ। बस, ऐसी ही अद्भुत और आश्चर्यजनक घटनाओं से यह उपन्यास भरा हुआ है। हिंदी साहित्य में इसके जोड़ का उपन्यास अभी तक नहीं छपा है। महाराज नरेन्द्रसिंह और कुमारी मल्लिकादेवी का प्रेम बड़े ही अच्छे ढंग से दिखाया गया है। इसमें बड़ी बड़ी भयानक लड़ाइयों का वर्णन है। जब बंगाल में वहाँ के नव्वाब के कारण घोर संकट उपस्थित हुआ, तब दिल्ली से स्वयं शहंशाह ने आकर वहां शान्ति-स्थापित की और अपने शाहज़ादे, का बंगाल का नव्वाब बनाया। आज से कई सौ वर्ष पहिले के ऐतिहासिक रहस्य जानने की इच्छा जिन्हें हो उन्हे इस उपन्यास को एक बार अवश्य पढ़ना चाहिए।