पृष्ठ:खूनी औरत का सात ख़ून.djvu/१४२

यह पृष्ठ जाँच लिया गया है।
( १३८ )
खूनी औरत का


और सज़ा पा जाता है।"

यह सुनकर फिर मैंने यह पूछा,--अच्छा' यह तो बतलाया जाय कि रसूलपुर के चौकीदारों ने अपने बयान में यह कहा है कि, 'मेरी ,यानी मुझ दुलारी की बैलगाड़ी पर सवार होकर अबदुल्ला थानेदार हींगन चौकीदार के साथ मेरे गांव की ओर गया था। क्यो , यह तो ठीक है न ? ,,

हाकिम,--"हां , यह सही है।

मैं,-"तो फिर मेरी वह गाड़ी या बैलों की जोड़ी क्या हुई ?

हाकिम,---" यह मुझे नहीं मालूम ।"

मैंने कहा,--" पर गवाहों की गवाही से यह बात साबित हो गई है कि, 'अबदुल्ला दौलतपुर गांव में इक्के पर चढ़ा हुआ पहुंचा था; और वहां ले रसूलपुर गांव में जब वह रात को वापस आया था, तब भी इक्के ही पर सवार होकर आया था । 'क्यों , यह भी ठीक है न ? ,,

हाकिम,--" हां, यह भी सही है।

मैं,--" मतो इस से यह बात साफ तौर पर ज़ाहिर हो सकती है कि मेरी गाड़ी और बैलों की जोड़ी अबदुल्ला ने ही कहीं रास्ते में टरका दी होगी ? ,,

हाकिम,--"यह मैं नहीं कह सकता।,

मैंने फिर कहा,--"हुजूर , एक बात और भी है,--और वह यह है कि रसूलपुर के चौकीदारों ने अपने बयान में यह कहा है कि, 'जब थानेदार लौट आए और खाना-पीना खाकर शराब पीने लगे; तब उन्होंने हम-छों चौकीदारों को यह हुकुम दिया कि,-'अब तुम सब अपनी कोठरी में जाकर श्राराम करो, क्यों कि अब मैं उस कैदी औरत का इज़हार लूंगा और उसने उन खूनों को कबूल कराऊंगा। इससे मुमकिन है कि वह औरत खूब शोरोगुल मचाचे, मगर तुम लौंग उसकी चीख-चिल्लाहट सुनकर यहां मत आना और अपनी