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सात खून।


सही-सही बयान लिखवाया है भोर बस कागज पर अपने अंगूठे का निशान भी कर दिया है। इसके अलावे, इस खून की पूरी-पूरी तहकीकात की गई है और मुफम्मिल रिपोर्ट हुजूर की खिदमत में पेश होने के लिये तैयार है।"

यों कहकर कोतवालसाहब धुप होगए गौर हाकिम (मजिस्ट्रेट) मे उनसे कहा,--"अच्छी बात है। आप सिलसिलेवार इस खून की बात बयान कर आइए ।"

यह सुनकर कोतवाल साहब ने अपनी मुट्ठी में दये हुए बादामी कागजों को खोला और उन्हें ठीक तरह से हाथ में लेकर पढ़ना प्रारम्भ किया,--

नौ बजने के करीब कोतवाली में दौलतपुर के तीन हरबाहे आए और ये मेरे रूबरू पेश किए गए । मैं उस वक्त कोतवाली में ही मौजूद था, इसलिये मैने बस तीनो हरमाहों को फोरम अपने सामने घुलाकर खन सभों का पयाम लिया और उस कागज पर इन तीनो के अंगूठे का निशान करा लिया । यह * * * की बात है।

"मेरे आगे आकर और मेरा हुक्म पाकर ये तीनो करीनो से बैठ गए और पाद इसके, हम तीनों में से "फलगू" नाम के हरवाहे यों अपना बयान लिखवाया,-

मेरा नाम " फलगू" है और मेरे इन दोनो साथियों में से जो मेरी दाहिनी ओर बैठा है, उसका नाम " ढोंदा है और बाई ओर-वाले का नाम “घोंघा " । हम-तीनो जात के 'कोइरी' हैं और 'दौलतपुर' नाम के गांव में रहते हैं । कई बरस से-शायद पांच, या छ:-सात साल से हमलोग खमी गावं के एक पालन विश्वनाधतिधारा' के यहां नौकरी करते और उनका खेत जोतते थे। हम सब चार हरवाहे थे, जिनमें से एक (पौधा ) 'कालू' नाम का कुरमी था, जो कल कतम किया गया। खैर, हम-सब इन्ही

(१५)रा०