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खग्रास

रेडियमधर्मिता के रूप मे जो पैमाइश की गई है, उससे भी उसके कई अरब वर्ष पुराने होने की बात का पता चलता है। अनुमान यह है कि पृथ्वी और हमारे सौर मण्डल के अन्य ग्रह बेचैनी और गड़बड़ के उस काल मे उत्पन्न हुए। उस समय असंख्य अन्य भी सौर मण्डल अवश्य उत्पन्न हुए होगे, क्योकि हमारा सूर्य एक सामान्य नक्षत्र के ढंग का है। और हमारे निकट पडौस मे ४०,००० सूर्य जैसे नक्षत्र दर्ज है।"

तिवारी की आँखे विस्मय से फैल गई। उन्होने बोलना चाहा—पर मुंह से बोली नही फूटी। परन्तु गूढ पुरुष उसी गति से कहते चले गए—"उपग्रहो के निर्माण की प्रारम्भिक काल की इस मनातनी पद्धति के अतिरिक्त भी अन्य बहुत-सी पद्धतियाँ आज मान्यता प्राप्त कर चुकी है। इनकी विस्तार से चर्चा न करते हुए हम यही कहेगे कि आज करोड़ों सौरमण्डल अवश्य विद्यमान है। यह कहा जा सकता है कि इन समस्त नक्षत्रो से ग्रह उत्पन्न हुए है। इस सम्बन्ध मे केवल वे नक्षत्र अपवाद रूप हो सकते है, जिनकी उपग्रह निर्माण करने की सामग्री किसी दूसरे नक्षत्र ने हडप ली हो या गुरुत्वाकर्षण के फलस्वरूप वह अन्यत्र बिखर गई हो। ज्योतिभौतिक वैज्ञानिको ने यह स्पष्ट दिखला दिया है कि हमारे जैसी रासायनिक और भौतिक स्थिति समस्त ब्रह्माण्ड मे विद्यमान है। हमारी दुनिया मे कोई असाधारण बात नहीं है।

"अपने १० ग्रहो तथा करोड़ों अन्य नक्षत्रो की सम्भावना को ध्यान मे रखते हुए हम कह सकते है कि इनमे से कुछ ग्रहो मे वास्तविक जीवन है अथवा नही, अथवा इस प्रकार की जीव-विज्ञान सम्बन्धी क्रिया हमारे ग्रह तक ही सीमित है।"

"तो भगवन् क्या हम अकेले नहीं है?"

"निश्चय ही नही। हम अकेले नहीं है। हम जब तीसरी विचारणीय बात पर प्रकाश डाल चुकेगे, तब और भी अधिक विश्वास के साथ जीवन के व्यापक रूप मे बिखरे होने की बात को स्वीकार करने में समर्थ हो जायेगे।