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खग्रास

के लिए बिजली के प्रयोगों की खेतों में व्यवस्था थी। हरकुत्स नगर की आबादी भी ४ लाख थी और इसके बीच अगास नदी बहती थी। नगर के बाहर चारों ओर सेव के बागों की भरमार थी। उत्तरी साइबेरिया में आर्कटिक सागर का जहाजी मार्ग खुल जाने से ओवी यनीसी और लीना इन तीनों नदियों में बड़े-बड़े जहाज चल रहे थें जो दक्षिण के मैदानों तक पहुँचते थें। संक्षेप में समूचा साइबेरिया सोवियत दुर्ग बनता जा रहा था। जहाँ बड़े-बड़े उद्योग-केन्द्र और विज्ञान-केन्द्रों की स्थापना हो रही थी।

अमृत-रस

कैलिफोर्निया के एनाहिम स्थित डिस्पेलैण्ड के टुमारलैण्ड में एक छोटा सा सुन्दर बंगला था। बंगला साधारण मकानों से कुछ निराले ढंग का बना था। बंगले की सब दीवारें और फर्श तथा छते खालिस प्लास्टर की बनी थी। छोटे से बंगले में एक परिवार के लिए सब सुख-साधन उपलब्ध थें। मकान में चार कक्ष थें। इनके अतिरिक्त एक रसोई घर और दो स्नानागार भी थें। मकान की खिड़कियां भी प्लास्टर की थी। यहाँ तक कि खिड़कियों पर परदे भी प्लास्टिक ही के थे। मकान के हिस्से पेचीदा घुमावदार बने थें और उसमें रहने वाला जिस कमरे में जाना चाहे उसी का द्वार उसके सामने घूम कर आप ही आप आ जाता था। यह मकान अचल नहीं था और उसे दो ही घण्टों में फोल्ड करके एक ट्रक में लाद कर दूसरे स्थल पर ले जाया जा सकता था। तथा दो ही घण्टे मे वहाँ उसे आसानी से फिट किया जा सकता था। समूचा मकान वातानुकूलित था। तथा शीत गर्मी का मकान पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता था। जीवन में नित्य व्यवहार में आने वाली सामग्री को व्यवहारोपगीय बनाने के सब साधन वहाँ यन्त्र चालित थें, भोजन स्वयं पकता और परसा जाता था। कपड़े आप इस्त्री हो जाते थें। तथा समय, दिन, तिथि, घण्टा मिनट आप ही पता लग जाता था। इन सब बातों के अतिरिक्त मकान में एक और व्यवस्था थी कि मकान के फर्शों तथा दीवारों में ऐसी विकिरणों का समाहार किया गया था कि कोई कीटाणु वहाँ न