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खग्रास

फैलाये गम्भीर बात चीत में व्यस्त थें, वह इस्पात के लोहावरण से सुरक्षित था और उसमे सैकड़ों विविध प्रकार के यन्त्रों का जाल फैला हुआ था। तीनों वैज्ञानिकों में एक थें डाक्टर पिकरिग—जो कैलिफोर्निया इन्स्टीट्यूट आव-टेक्नौलाजी में जैट राकेट प्रयोगशाला में निर्देशक थें। बालचन्द्र सम्बन्धी इनका ज्ञान असाधारण था। डाक्टर पिकरिग न्यूज़ीलैन्ड के निवासी थें। तथा गत चालीस वर्षोंं से वे अमेरिका की कैलिफोर्निया इन्स्टीट्यूट के अध्यक्ष थें, तथा अनेक वैज्ञानिक संस्थाओं के पदाधिकारी सदस्य थें। इस समय जो नवीन उपग्रह अन्तरिक्ष में छोड़ा जाने वाला था तथा जिसके सम्बन्ध में यह अतिगोपनीय गवेषणा हो रही थी, उसके प्रक्षेपण के लिए जुपीटर राकेट का ऊपरी खण्ड इन्हीं ने निर्माण किया था।

दूसरे थे वान ब्रान, वही जर्मन वैज्ञानिक।

तीसरे वैज्ञानिक थें डा॰ जेम्स एलन। इन्हीं ने राकेटों द्वारा ऊँचाई पर की जाने वाली खोज से सम्बन्धित महत्वपूर्ण ज्ञान अर्जन किया था। अब आप अन्तर्राष्ट्रीय भू-भौतिकी वर्ष की अमरीकी समिति के सदस्य थें। डाक्टर एलन की ख्याति राकेट विज्ञान और ब्रह्माण्ड किरणों के सम्बन्ध में असाधारण ज्ञान के कारण थी। आपने सन् ४९ में राकेट संस्था का हिकमैन पदक तथा वाशिंगटन विज्ञान एकादमी का भौतिक शास्त्र सम्बन्धी पुरष्कार प्राप्त किया था। ये वैज्ञानिक सत्तर फुट लम्बे चालक यन्त्र से अन्तरिक्ष में उपग्रह फेंकने की तैयारी कर रहे थें।

डाक्टर जेम्स एलन कह रहे थें—

"मित्रों, आज हम एक महत्वपूर्ण अनुष्ठान का आरम्भ कर रहे हैं। आप लोग भली भाँति जानते हैं कि मनुष्य ने ज्यों-ज्यों विज्ञान के क्षेत्र में कदम बढ़ाया, उसका ध्यान अन्तरिक्ष के रहस्य को जानने की ओर बढ़ाता गया। चिरकाल से मानव की इच्छा यह रही कि वह किसी तरह चन्द्रमा, मंगल, शुक्र, आदि ग्रहों में पहुँच जाय। परन्तु मानव की यह इच्छा वैज्ञानिक ही पूरी कर सकते थें। वे ही ऐसे साधन प्रस्तुत कर सकते थें जिनके द्वारा अन्तरिक्ष में स्थित ग्रहों तक पहुँचने में सहायक हो। इन सब बातों पर विचार