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खग्रास

"सूर्य के विकरण का क्या प्रभाव है?"

"सूर्य के विकरण का जो अध्ययन किया गया है, उससे पता चलता है कि इस विकिरण से प्राप्त होने वाली राक्स-किरणे भूमि से ४० मील की ऊँचाई पर विद्यमान है। इन तथा भू-भौतिक वर्ष के अन्तर्गत किए गए अन्य अध्ययनो से निश्चित रूप में सूर्य तथा हमारे जीवन पर उसके प्रभाव की जानकारी की अभिवृद्धि हो सकेगी।"

"अच्छा, सन् १९५७ के दिसम्बर में आप के वैज्ञानिको ने केलिफोर्निया के पास सैन्ट निकोलस द्वीप से यन्त्रो से लैस राकेट छोडे थे। उनसे, आप समझते है कि आपको कुछ तथ्य ज्ञात हुए?

"महाशय यद्यपि ये तथ्य अत्यन्त गोपनीय है परन्तु मैं आपको संक्षेप में इतना ही बता सकता हूँ कि उनसे हमें इस बात का पता चल गया है कि सूर्य से उठने वाली प्रत्येक लपट से उसके अपने वायुमण्डल का तापमान १५ गुना बढ जाता है। समझा जाता है कि इस ताप के फलस्वरूप, जो लगभग २० लाख डिग्री फारेनहाइट होता है, सूर्य में विद्यमान गैसे इतनी गर्म होजाती है, कि बड़ी मात्रा में एक्स-किरणे फूट निकलती है। और वे प्रकाश की गति से पृथ्वी की ओर रवाना हो जाती है। तथा इनके आगमन के फलस्वरूप तत्काल ही रेडियो-संचार में बाधा पैदा हो जाती है।"

"मैंने सुना है कि कनाडा में फोर्ट चर्चिल से अमरीकी अन्वेषक दल ने ऊर्ध्वगामी एरोवी राकेट छोड़े है।"

"आपने ठीक सुना है। उन से पता चला है कि पृथ्वी से बहुत ऊँचाई पर जो शीतकालीन तेज हवाए और तूफान उठते है, उनकी गति ३३५ मील प्रति घण्टा तक पहुँच जाती है।"

"अभी अमेरिकनो ने ग्रीनलैण्ड के पश्चिम से मापक यन्त्रो से युक्त एक राकेट भी छोड़ा था, उसका शायद यही अभिप्राय था?"

"नहीं। उससे तो पहिली बार ही इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण मिला है कि विश्व के ऊपर और नीचे दोनो ओर एक बड़ी विद्युत-तरंग की सतह विद्यमान है। यह सतह चुम्बकीय तूफानो के समय विशेष रूप से बन जाती