पृष्ठ:काश्मीर कुसुम.djvu/२७५

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मैं मरा ! ! ! इस से बढ़ के और क्या दुःख होगा कि जिस के एक खेल में कम और रूस के महाराज पारिस की गलियों में दौड़ते थे उस के शव के साथ वही ग्रास निवासी लोग ! ! ! क्यों धन के अभिमानियो ! तुम अब भी अपने धन का अभिमान करोगे और अपने से छोटों को दुःख देने में प्रवत होगे ? . यह वही नैपोलियन है जिस का दादा ऐसा प्रतापी था जिसने सारे युरप को हिला दिया था और सब अंगरेज़ों को दातों चने चबवा दिए थे। जर्मनी के युद्ध में नैपोलियनं पराजित हुआ इस का कुछ शोच नहीं क्योंकि जिश काल में नेपोलियन के स्थान का वा उस की समाधि का वा उस युद्ध स्थान का भी चिन्ह भी न मिलेगा उस समय तक उम का नाम वर्तमान र हैगा सहाराज नेपोलियन चिजिल हर्स नामक स्थान में गाड़े गए उस समय वोनापार्ट के वंश के सब लोग और पारिस के समस्त शिल्पविद्या के गुणियों का समाज विमान के आगे था लार्डसाइडनी और लार्डस्फील्ड महारानी विकाटोरिया और युवराज की ओर से आए थे और पचास सहस्र मनु प्य केवल कौतुक देखने को एकत्र थे और राजकुमार और विधवा महारानी भी साथ थीं शव को समाधि करने के पीछे बोनापार्ट के वंश के सब लोगों ने राजकुमार को पिता के स्थानापन्न भाव से बन्दना किया। इङलैंड रूस - त्यादि सब राजकीय कार्यालय दस दिवस तक शोक भेष में रहे। हम को लिखने में अत्यन्त खेद होता है कि पृथ्वी पर का एक महा वि- ख्यात पुरुष समाप्त हुषा इस मनुष्य को सब प्रायुषा प्रारम्भ से अंत तक चम- स्कारित और फेरफार की एक विलक्षण शृङ्खला थी कुछ काल तक राजा और कुछ काल तक रंका, सांप्रत के सब पराक्रमी राजा उसका आदर करते थे तो क्या अब उस को तुच्छ मान कर उस की अप्रतिष्ठा करनी चाहिए ? यद्यपि वे राज सिंहासन पर न थे औ इंग्लण्ड में केवल एक साधारण मनुषा को समान रहते थे तथापि उन को मरण की दुःख वार्ता श्रवण कर को राजकीय पौर राजसभा के अधिकारियों को चित अवश्य चकित होंगे और फ्रांस के राज्य प्रबंधों में इन के मृत्यु से कुछ विलक्षण फेरफार होगा। यह नेपोलिन च लोगों को मुख्य महाराज थे। और इन को तीसरे नैपोलियन कहते थे और बड़े नेपोलियन बोनापार्ट के भतीजे थे इन का जन्म तारीख २० आपन्न सन १८०८ में फांस देश में हुप्राथा और इन के पिता का नाम लुई नोनापार्ट था जो हालैंड के महाराज थे जब यह सात बर्ष के हुए थे तब