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काव्य में रहस्यवाद


है। एक की अस्पष्टता विचार-श्रृंखला की सघनता और जटिलता के कारण होती है और दूसरे की विचार-श्रृंखला के सर्वथा अभाव के कारण। एक में बुद्धितत्त्व (intellectuality) के साथ पूरा साहचर्य्य है और दूसरे में विच्छेद। दोनों एक दूसरे के विरुद्ध हैं।

काव्यक्षेत्र में ब्राउनिग का लन्य बहुत ही उच्च था। उनका लक्ष्य था गृढ़ और ऊँचे विचारों के साथ हृदय के भावों का संयोग करना। जैसा हम पहले कह आए हैं अब मनुष्य का ज्ञानक्षेत्र बुद्धिव्यवसायात्मक या विचारात्मक होकर अत्यन्त विस्मृत हो गया है। अतः उसके विस्तार के साथ हमें अपने हृदय का विस्तार भी बढ़ाना पड़ेगा। कितने गहरे, ऊॅचे और व्यापक विचारों के साथ हमारे किसी भाव या मनोविकार का संयोग कराया जा सका है; कितने भव्य और विशाल तथ्यो तक हमारा हृदय पहुँचाया जा सका है, इसका विचार भी कवियों की उच्चता स्थिर करने में बराबर रखना पड़ेगा। ब्राउनिंग का आदर्श यही था। व कवि-कर्म को बहुत गम्भीर समझते थे, मनबहलाव या कुतूहल की सामग्री नहीं। चित्रकला, मूर्तिकला आदि हलकी कलाओं के साथ कविता को बिल्कुल मिलाकर जी काव्य- समीक्षा योरप में चली उसने काव्य के लक्ष्य की धारणा बहुत हलकी और संकुचित कर दी।

सच्ची स्वाभाविक रहस्य-भावनावाले कवि और साम्प्रदायिक या सिद्धान्ती रहस्यवादी की पहचान के लिए काव्य-वस्तु (Matreer) का भेद आरम्भ में ही हम दिखा आए हैं। विधान-विधि